संयुक्त निकाय भाग १ | sanyukta Nikaya Vol 1

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sanyukta Nikaya Vol 1  by त्रिपिटकाचार्य भिक्षु - Tripitkacharya Bhikshuभिक्षु जगदीश काश्यप - Bhikshu Jagdish Kashyap

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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८ ५ ) ऋतगेद में वर्णित कुद सम्सधतः उत्तर कु ही है। पालि साहित्य में वर्णित कुरु जनपद्‌ ८००० योजय विस्तृत था । र अनपदे के दाजाग्रो को कौरम्ब का जाता धा । कम्मासवम्म कुक जनपद का चक प्रसिद्ध नगर था, जहाँ बुद्ध ने महासतिपद्ठान और महानिदान जैसे महत्वपूर्ण एवं गम्मीरं सूनो का उपदेश किया था| इस जनपद का दूसरा प्रमुख नगर थुलकोह्वित था। रद्रपाल स्थविर दसी नगर से মঙ্গজিন ভু प्रसिद्ध मिश्च ये । कुर अनपद के उत्तर सरस्वती तथा दक्षिण दृश्यवती नदियाँ बहती थीं । वतंमान सोनपह, अमिन, कर्माल और पानीपत के जिले कुर जनपद में ही पढ़ते हैं। महासुतसोम जातक के अनुसार कुरु जनपद ३०० योजन विस्तृत था । इसकी राजधानी इहन्दप्टन ( इण्व्रप्रस्थ ) नगर या, जो सात योजन मे पौरा दुभा था। § पञ्चाट पश्चार जनपद्‌ भागीरथी नदो से दो भागो में विभक्त था--उत्तर पश्चाल भौर दक्षिण पश्चाक । उत्तर पदञ्चाऊक की राजधातों अद्दिच्छन्न नगर था, जहाँ दुसुख नामक राजा राज्य करता था। वर्॑नान समय में बरेली जिले का रामनगर ही अद्विच्छत्न माना जाता हैं। दक्षिण पञ्चाछ की राजधानी काम्पिल्य नगर था, जो फरक्खाबाद जिके के कम्पिल के स्थान पर स्थित था। समय-समय पर राजाओं की इच्छा के अनुसार कारिपल्य नगर मे भी उत्तर पठ्चाल की राजधानी रहा करती थी। पञ्चारू-नरश् की भगिनी का पुत्र विशाख श्राघस्ती जाकर भगवान्‌ के पास दीक्षित हुआ और छः जभिज्ञाओं को प्राप्त किया था। पहचाल जनपद मे वर्तमान बदा, एर्कगवाबाद्‌, आर उत्तर प्रदेश के पमौपवतीं জি पडते है । $ मत्स्य मन्स्थ जनपद वर्तमान जयपुर राज्य मे पडताथा। इसके अन्तगंत पूरा भलर रान्य जओौर भरतपुर का कुछ भाग भी पड़ता है। सत्स्प जनपद्‌ की राजधानी विराट नगर था। नादिका के गिश्जिकावसथ में विहार करते हुए सगवान्‌ बुद्ध ने मत्स्य जनपद का वर्णन किया था। यह इन्त्नप्रस्थ के दक्षिण-पश्चिम और सूरसन के दक्षिण स्थित था । $ शूरखेन झूरसेन जनपद की राजधानी मधुरा नगरी (मथुरा) थी, जो कोश्मम्बी की मति युना के किनारे बसी थी। यहाँ पर भगवान्‌ बुद्ध गये थे ओर मधुरा के विहार मे घास किया था। मथुरा प्रदेश मे महा- कात्यायन ने घूम-घूम कर बुद्ध धर्म का प्रचार किया था। उस समय शरसेन का राज़ा अपन्तिपुश्र था । वर्तमान सधुरा से ५ मीछ दक्षिण-पद्चिम स्थित महोली नामक स्थान प्राचीन मधुरा नणरी मानी जाती है। दक्षिण भारत में सी प्राचीन काल में सथुरा नासक एक नगर था , जिसे दक्षिण मधुरा कहा जाता था । बह पाण्ड राज्य करी राजधानी था । उसके नष्टाधशेष इस समय मद्गास प्रान्त में बैगी नदी के किनारे विधमान हैं। 8 अश्वक अश्यक अनपदु की राजजानी पोतन नगर था। अश्वक-नरेश महाकात्यायन द्वारा प्रशलित हो गगय्ना था | जातक से ज्ञात होता है कि दन्तपुर नरेश कालिंग और अहृवक नरेश में पहले संघर्ष हुआ करता था, किन्तु पीछे दोनों का मेत्री सम्बन्ध हो गया था। पोतन कभी काशी राज्य में भी गिवा ब्ाता था । यह अरश्वक गोदाघरी के किनारे तक विस्तृत भा। धावरी गोदाबरी के किनारे अश्वक जनपद में ही




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