राजस्थान के जैन शास्त्र भण्डारों की ग्रन्थ - सूची भाग - 3 | Rajasthan Ke Jain Shastra Bhandaron Ki Granth - Suchi Bhag - 3

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Rajasthan Ke Jain Shastra Bhandaron Ki Granth - Suchi Bhag - 3  by कस्तूरचंद कासलीवाल - Kasturchand Kasleeval

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( ७ ) किया. जा रही है और शीघ्र ही करीब २५०० पढों का-एक बृहदू संग्रह प्रकाशित करने का विचार है । जिससे कम से कम यह तो पता चल सकेगा कि जैन विद्वानों ने इस दिशा में कितना महत्त्वपूर्ण कार्य किया है । गुठकों का मह्च--- মা धांस्तव में यदि देखों जाँवें तो जितनों भी महत्त्वपूर्ण एवं अंनुपलब्ध सोहित्य मिलता है उसका अधिकांश भागे इन्हीं गुटकों में संग्रहीत किया हुआ है। जन शऑपषकों को' गुटकों में छोटी छोटी रंचनाथे संग्रहीत कंरवानें को बंडों-चांवें. थी । कभी केभी तों वे स्वयं दी संह कैरं लिया कंरते थे औंर कभी अन्य लेखको ऊ द्वारा संग्रहं क्वाति भे । इतं दोनों अर्ासे मे भी जितना हिन्दी का नवीन साहित्य मिला है उसका आधे से अधिक भाग इन्हीं गुटकों में संग्रह किया हुआ है दोनों मेंण्डार्रों में गुटंकों की संख्या ३०५. | यद्यपि इस गुटकों में सर्बसाधारण के काम आने वाले स्तोन्न, पृजायें, कथायें आदि की ही अधिक संख्या है. किन्तु महत्त्वपूर्ण साहित्य भी इन्हीं गुटकों में उपलब्ध होता है | गुटके सभी साइज के मिलते है । यदिं किसी गुठके मे १८-२० पत्र ही हैँ: तो किसी किसी शुटके. में ७००-४५०० पत्र तक & । ठोलियों के मेन्द्र के शास्त्र भस्डार के एक गुटके में ६५४ पत्र है; जिनमें ४७ पूजाओं का संग्रह किया हुआ है । कुछ गुटकों में तो लेखनकाल उसके अन्त में दिया हुआ होता है कित्तु-कुछ गुट्कों में बीच बीच सें भी लेखन- फाल दे दिया जाता है अर्थात्‌ जेसे जेसे पाठ समाप्त होते ज़ाते हैँ. बेसे वेसे लेखनकाल भी दे दिया जाता है । । চি = सोरित्यिंकं एवं मिलते दं । यदि इन्दी लुसर्खो के ्राधार पर कोई खोज कीं जाचे तो बह आयुर्वेदिक साहित्य के लिये भह्तत्त्वपूर्ण चीज प्रमाणित, हो सकती है । ये नुसखे हिन्दी भाषा में, अनुभव के आधार पर लिखे हुये हैं. । - - , = ~= ५ = ~ ‡ £ ৮৫18 ২ 1 आयुर्वेदिक साहित्य के अतिरिक्त किसी किंछी' गुंटके में ऐतिहासिक सामग्री भी मिल जाती है । यह सामग्री मुख्येतें: राजाओं अथेबा वांदशाहों की वंशावलि के रूपं में होती है । कौंन राजा कद शज्य॑ सिंहासंन पंर बैठा तथां उसने कितने वर्ष, कितने महिने एव कितने' दिन तक शासनं किया आदि विवरण दिया हुआ रहता है । ग्रन्थ-घची फे सम्बन्धं में--- ~ प्रस्तुत अन्थ-सूची में जयपुर के केवल दो शास्त्र भण्डारों की सूची है। हमारा विचार तो एंक भण्डार की और-सूची देना था लेकिन.अन्थ सूची के अधिक -पंत्र हो जाने के डर से नहीं दिया गया | प्रस्तुत अन्थ सूची सें जिन नपीर्न रचनाओं का उल्लेख आया है. उनके आदि अन्त भाग भी दे दिये गये हैं जिससे विद्वानों को ग्रन्थ की भाषा, रचनाकाल, एवं अन्थकार के सम्बन्ध मे कुछ परिचय मिल' सके ।




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