रसगन्धर्व | Ras Gandharv
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1 MB
कुल पष्ठ :
86
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)५ 4 4 न
तीनों :
तीनों :
: सुस्ती नहीं, क्रान्ति... क्रान्ति भरा गयी 1
£ ग्ररीबी हट गयी, कुर्सी पट गयी, रात कट गयी ?
‡ कट गयी ।
४ तो बताग्रो, झव हम ज़िम्मेदारी संभालें ।
चारों कू डे के ढेर पर इस तरह दूट पड़ते हैं मानो उसमें से
अपने लिए कुछ पाना चाहते हूं ।
४ जोर तेरा --
: होश्या७ !
४ भाई मेरा--
४ होश्या55 !
४ उड़न कबुतर--
£ होश्या$5 !
४ भूरी बिल्ली--
: होश्या& !
: पहुंची दिल्ली--
: होश्याऽऽ !
: बन पटरानी--
: होदयाऽऽ !
४ बोले बानी--
४ होश्या5$ !
: (नारी-क्ठ बनाकर) तुम. ..मुझे खून दो, मैं. . तुम्हें... दो मुट्ठी...
चून दूंगी ।
: (आ्रालाप लेकर) होश्या55. ,,हीश्या55... !
£ (नारी-कंठ में उसी तरह) देश...को...तुम्हारी..,जरूरत है,
इसलिए, ..श्रपनी ,..जरूरतें , ..कम. . .करो ।
(श्रालाप लेते हुए) होश्या$5, .,होश्या55. ., !
नेपथ्य में युद्ध के मगाड़ों की ध्वनि 1
(प्रालाप लेते हुए) डम-डम, ढम-ढम होश्या55, ..हंगम-जंगम
द्वोश्या55. ..!
नेपथ्य में ज॑से युद्ध का कोलाहल तेज्ञ हो उठता है। सहता
अं, ब, स, द कड़े में कुछ ढूंढ़ लेते हैं।
४ मिल गया, मुझे मेरा हथोड़ा सिल गया। (हथौड़ा कन्धे पर रखकर
मंच का चक्कर लगाता है। )
: यह् रहा र्दा, मेरा रन्दा । मेरी श्री । (रन्दः और पारी संभाले
रसमन्धवं : १५
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