संस्कृत - हिंदी कोश | Sanskrit - Hindi Kosh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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नक्नेक बि०् मास्ति कर्म यस्य ब० कप बह जिया जिसका कर्म न हो स्त्री ० - | है बिन पास्ति कला अवयवों यर्य न० ०1 अखंड मागरहित परत की उपाधि मकल्क विन निन्य० 1 तलछट रहित शुद्ध 2 निप्यार स्त्री० - अकरका चाँदनी चर्ह मा का प्रकाश मकल्द बिं० | म०्ब० 1 अनियज्रित जिस पर कोई ने हो दे दुर्बल अपोग्य 3 अनुलतीय मक्कइबात अब्य० न करमात न० स० | अनामर एकाएक सहसा आकस्मिक रूप से. रूम नयी न किन हे न नाग गए नगद फीफा किन न 1 सह विदवामों ने पुगस -हित है. अक्ाराण बिना किसी कारण नी. व्यर्थ ही. नाकरमात दाडिली- माता विक्रीणरति पन र ६५--कथ सवा त्यजेदकस्मात्पति रोयवस रघ० ४ | ४ पे । कक्षाच्ड लिव् | ने बे | 1 -सहमा ५६३ 4 डर जिसमें गन ते मे दी सम अप पिएं उलरत मात असपप पर खिलनें वाला थिना ऋतु के उपजा हुआ कुम्हदा आलत ध्यर्ष जन्म -- - उत्पस्व - जात वि बिना ऋठु के उपजा हुआ प्राक्शाजिक - -खलदोदद - सेघोशय. 1 असमय में बादलों का उठना या इकट्ठा होना 2 घुध बेला ऋतु के विपरीत या. अनुपयुक्त समय - सह बिल 1 पमय की हानि या देरी के सहन न करने वाला अधीर 2 गढ़ की साति दुढता के साथ अधिक समय लक ने टिके बाला | मकिचन दि /सास्ति किलन यम्य त० जिसके पास कुछ मी ते हो विस्डुल गरीब नितात सनिर्षन- अकिचन सन्‌ प्रमव से सम्पदामु- कु० ५1३७४ अभिसिक्ल वि० | अकिनित -शा-क कुछ न जानने बाप निपट अज्ञानी मर्च० पट । प्रकिचिस्टर वि उप स० £ अधीन -परतत्- मदमर्किडिचस्कर थे. - देशी ० 3 । 2 भोला सोधा झकृष्ठ विस | न०्दत 1 जो दँठा ने हो जिसकी खाल वि० सहसा उसपस या उत्पादित -साइड- . बस क्रोध पडित्यादि का अप्रामशिव प्रदर्शन पाल आकस्मिक घटना जि जन्म होगे दो मर जाने वाला शुलमभ अभानेक गई कर दे क्रिन्दि० कप से एकाएक सहया चरण झन इस्पकाडे लस्वीरि थता कर्तिवि- देव पदानि गावा - हा? रे रैए। अकाल वि० | न०्य० | 1 इच्छा राग या प्रेम में मुक्त 2 मनिस्छक जगनिलावी 3 प्रेम से अप्रभावित प्रेम की अधीनता से मुक्त दा १1२३ 4 अचेतन जन भप्रेत क्रि वि० | अराम-तसिए | श बेमन से बिना इरादे के अनजानपन में इपरें क्ृतबतस्तु पापान्येतान्यकामत . मनु० १1२४४ । अकाथ जि न०्ब० शरीररहित अररीरी 2 राहु की एक उपाधि 3 परत को उत्ाधि । वि नर बे? कारणरहित निराधार स्वत - स्कूस -.-नगभ्‌ कारण श्रयोजन था आधार का अभा। -- किमकारणमेब दर्शन विलपल्ये रतये ने दीयते कु ० ४1७ लकारणम अकारणात अकारने- कृत जि० बिना कारण के सयोगबदा व्यय । सका वि० | न०्ब० अनुपपक्ति -यंब अनुचित या बुरा काम अपराधपूर्ण कर्य । सम कारन बुर काम करने बाला जो बुरा काम करे कतेन्य हा । जि न अ+ असामधिक प्रास्कालिक ले गलत शसय मशुभ या कुसमम तप बात के लिए मद समय -- -अस्यार्छोी नारी २।३३। सम० शसुबल -युध्यस नल कि ना ने नल कला न ला नर ननण पा रवि हो. ८ 2 कम करने योर्य ३ स्थिर 4 | पकूत / करि दि० कहीं से नहीं इसका प्रयोग केवल पें होता है सम अल शिव का नाम भय | ० सुरक्षित जिसे कही हें. भीं भय न जा. अकुलोमग सचारों जात - लत यानि पति व पदान्यामस्खरायोधने पाठान्तर अपराइमुसाएं -उल० प1३५ ३ मशुप्यम ० | नन त० ? 1 बिना खोट की धातु सोना यरदी 2 सोई भो सोट की धातु अछुशल वि० | नत त० 1 अशुप दुर्भाग्यबस्त 2 जो बतुर या होशियार ने हो --- लग अभगल दुर्भाग्य अकषूपार नडा - रूप + ऋ - अण 1 समुद्र 2 सूर्य 3 कछ़ुआ 4 कछुओं का राजा जिस पर पृथ्वी का मार है 5 पत्थर था चट्टान । अशच्छ | वि०् न०्जन मै कठिताई से मुक्त --च्छम कटिनाई का अभाव सरलता सुविया । नकल वि० पक क्त 1 जो किया न गया हो 2 गलत था. भिन्न तरीके थे किया गया 3 जो तैयार न हो जैसे रसोई 4 अनिभित 5 जिसने को राम ने किया हो 6 अपक कच्चा --सा जो बेटी होने पर भी बेटी न मानी जाकर पुष्रों के समकझा समझी जाय नपु० कार्य जो किया ने गया हो काम का ते किया जाना जो काम कबी सुता ने गया हों । सम०- -अचे वि असफल वि०् जिसे हमियार बलाने का अभ्यास मे हो आत्मन वबि० । अजानो मूखं असतुकति लग. मस्तिष्क का 2 परश्रह्मा या अहा के स्तरूप में भिन्न उड़ाह वि




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