जवाहर किरणावली रामवनगमन [भाग १] | Javahar Kiranavali Ramvangaman [Part 1]

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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राम-वनगमन ] [ १३प्रकार मानव-समाज में जब ऊँच--नीच का भेद मिटेगा, सब समान रूप से मिलकर रदेगे तभो समाज की शक्ति बढ़ेगी । इसी में सब की शोभा है। बडों को राम का आदश अपनाना चाहिए। राम अपने छोटे भाइयों से किस प्रकार द्दिल-मित्र- कर रहते थे ? दशरथ के घर से प्रजाजनों को एकता का ज्व- लंत और जीवित पाठ सीखने को मिलता था। यह पाठ सीख- कर लोग छोटे-वड़े का भेद मूल-से गये थे । बडे, छोटों पर अत्यधिक कृपा रखते थे ।बाप बडा और बेटा छोटा होता है पर बाप स्वय गहने पहनता है या बेटे को पहनाता है? बाप स्वयं गहने न पहनकर प्रसन्नता का अनुभव करता है । गहने पहनाकर वह बेटे की गद्दन नहीं कटवाता चरन्‌ उसकी रक्षा का उत्तरदा- यित्व भी अपने ऊपर लेता है। साराश यद्द है कि जो बडा बनता है वह छोटों की सुख--सुविधा का पहले विचार करता है ओर उसकी रक्षा के लिए जिम्मेवार बनता है। असल में নভা वही है जो छोटो की रक्षा के लिए ही अपने बडप्पन का उपभोग करता द श्रौर उनकी रन्ता में दी अपने बड़प्पन कीसाथंकता सममता है । जो छोटों की रक्षा के लिए अपने वडप्पन का बिनां किसी हिचकिचाहट के त्याग नहीं करसकता वह वड़ा नहीं कहा जा सकता । बड्प्पन छोटों के प्रति एक प्रकार का वड़ा उत्तरदायित्व है जो खेच्छा से




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