अपूर्व अवसर | Apurv Avasar

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutShri Kundakundachary
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
196
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about श्री कुन्दकुन्दाचार्य - Shri Kundakundachary
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(१४)पू प्रयोगादि कारणना योगी,
ऊधरगमन सिद्धाय प्राप सुस्थित जो;
सादि अनत अनत समाधि सुखां,
अनंत दर्शन ज्ञान अनंत दित जो ।अपूषे० ॥१९॥जे पद श्री सवब्े दीएुं ज्ञानमां,
कदी शक्या नहीं पण ते श्री मगवान जो;
বহ स्वरूपने अन्यवाणी ते शु कहे !
अनुभवगोचर मात्र रह ते ज्ञान जो ॥अपूब० ॥२०॥एद परमपद प्रापि शयु ध्यान में,
गजा वगरने हाल भनोर्थ रूप जो;
तो पण निश्चय राजचन्द्र मनने रहो,
সন্ত আন্বাহ थाश ते ज॑ स्वरूप जो ॥अपूच० ॥२१॥च
User Reviews
No Reviews | Add Yours...