सौर = परिवार | Saur - Parivaar

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
310 MB
कुल पष्ठ :
805
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)सोर-परिवार
अध्याय १प्रारम्भिक बातें१--सव विज्ञानों का पिता--सू्य, चन्द्रमा और तारे
सृष्टि के आदि से हो मनुष्य के हृदय में आश्चये की प्रबल तरंगें
उठाते रहे होंगे | यहो बात है जिसके कारण ज्योतिष का जन्म सब
विज्ञानों से पहले हुआ और जिसके कारण अब तक इसमें बराबर
उन्नति होती रही है। ज्योतिष दूसरे विज्ञानों का पिता है, क्योंकि
सूर्य, चन्द्रमा और नक्षत्रों के नियमित उदयास्त से, चन्द्रमा के विधि-
युक्त घटने बढ़ने से, श्रार जाड़ा, गरमो, बरसात, इत्यादि ऋतुओं
के नियमानुसार लोटने से ही पहले-पहल मनुष्यों ने यह सीखा
होगा कि इस परिवतैनशीक्ष संसार में कोई नियम भी है और
नियमों का ज्ञान करना ही विज्ञान की उत्पत्ति का मूल कारण है |
इसके अतिरिक्त, जैसे तुच्छ धातुओं से सुबण बनाने की खोज में
रसायन-शाखत्र और रोगों से मुक्ति पाने की चेष्टा में वेद्यक-शास्त्र की
उत्पत्ति हुई, उसी प्रकार ज्योतिष के प्रश्नों को हल करने में गणित-
शास्त्र के अनेक अंगों की उत्पत्ति हुईं श्रेर आज-कल भी ज्योतिष के
कारण गणित में विशेष उन्नति हो रही हे ।गोलीय त्रिकोणमिति (६)) ९11८४ []1.10010191৮) জী
उत्पत्ति और विकास केवल नक्षत्रों के परस्पर सम्बन्ध जानने की
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