श्रीजैनसिद्धान्तप्रवेशिका | Shri Jain Siddhant Praweshika

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Shri Jain Siddhant Praweshika by श्री गोपालदास - Shree Gopal Das

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(१३) बाधा आती है। क्योंकि शाख्रमें पाषको दुःख देने- वाला लिखा है । ५८ स्ववचनबाधित किसको कहते हैं! ५८ जिसके साध्यम अपने वचनसे ही बाधा आवै । जेसे- मेरी माता बन्ध्या है । क्योकि पुरुषका संयोग होनेपर भी उसके गभ नहीं रहता । ५९ अनुमानके कितने अग हैँ ! ५९ पांच हैँ । प्रतिज्ञा, देतु, उदाहरण, उपनय और निगमन । ६० प्रतिज्ञा किसको कहते हे ६० पक्ष जौर साध्यके कहनेको प्रतिज्ञा कहते है । जैसे--““इस पर्वत अभि है |” ६१ हेतु किसको कहते ই? ६१ साधनके वचनको (कहनेको ) हेतु कहते हैं । जैसे--“क्योंकि यह धूमवान्‌ है ।” ६२ उदाहरण किसको कहते हैं ? ६२ व्याप्तिपूर्वक दृष्टान्तके कहनेको उदाहरण कहते




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