त्रिपुरी का इतिहस | Tripuri Ka Itihas

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutMahamahopadhyaya Rai Bahadur Pandit Gaurishankar Hirachand Ojha
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
7 MB
कुल पष्ठ :
290
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about महामहोपाध्याय राय बहादुर पंडित गौरीशंकर हीराचन्द्र ओझा - Mahamahopadhyaya Rai Bahadur Pandit Gaurishankar Hirachand Ojha
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(2 )
उपल प्रयत्न खम वीर तनय. नरसिंह देव सुर गुरु सेवी ॥६२॥
जयसिंह भ्रात जिसके विजयो, सौमित्रि राम सम प्रोतिवान 1
शौर्योज्वल सव भूपति जिनकी-सेवां रत क्रते कीतिंगान ॥१३॥
गुजर तन जजेर ज्ञीण तुरुक-भागे त्रासित हो तृपति शेप ।
भूत्ते क तल निज काम-फेलि, जव छुना विजय राञ्याभिपेक ॥१४।
इन्द्रमभा हिमहार गुच्छ कौ, निन्दित करती कीतिं लता)
चन्दन सम शीत्तल संखोग मे, हई चियोगिनि दूर गता ॥१५॥
सिहासन-मोलि-रत्न-मखि जो, विक्रमादित्य प्रख्यात नाम |
निश्वल चिन स्वगेवाच्छनायुत, निज मुजवल जीता धरा धाम ॥१॥
( शिला श्रौर ताग्रलेखो के आधार पर )
User Reviews
No Reviews | Add Yours...