कागज की किस्तियाँ | Kagaj Ki Kihsitya
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
56 MB
कुल पष्ठ :
182
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)सदा-नीरा करुणाअठ मासकी ज्वाला-सी ऋतु थी । मध्याह्लकी धरापर पाँव रखना
दभर थाः। कपिवस्तु ओर कोछिय नगरोकी सीमाओंको विभाजित करने-
वाटी नदी रोहिणीकी धार क्षीण होकर एक पतली तरर श्वेत रेखा बन
गयी थी । दोनों नगरोंके श्रमिकों और किसानोंमें विवाद उठ खड़ा हुआ
था | कपिलवस्तुके श्रमिक बाँध बनाकर रोहिणीका जल अपने लिए सुरक्षित
कर लेना चाहते थे और कोलिय नगरके श्रमिक उसी उपाय द्वारा अपने _
लिए । दोनों नगरोंमें ठन गयी । विवाद क्षत्रियों, सामन््तों और सेनापतियों
तक पहुँच चुका था । एक दिन प्रातःकाल दोनों ओरके सामन्त शारीरिक०१ ভোলা
28३... ॥
পপ পপ পলাसामर्थ्यके आधारपर विवादका निर्णय करनेके लिए आ डटे। आवेशमें |वध्वयागंत! की आ्राख्यायिकाएँ प 5
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