बौने और घायल फूल | Baune Aur Ghayal Phool

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Baune Aur Ghayal Phool by रांगेय राघव - Rangeya Raghav

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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[५ हाजी ! भेड़ पर ऊन कोई नहीं छोड़ता । भाइयों, आप क्या कहते हैं। देखिये कांगरेस के जमाने में श्राप इतना बोल छेते थे ? राजा के जमाने में आपको यहु ग्राजादी थी ।* सो क्‍या हुआ ? लगास न बढ़ा दिया, तमाकू का टैक्स नहीं बढ़ा दिया । ऐसे बोलने भी न देंगे, न ऐसे राजा के जाये हैं । दो दो कौडी के टुपिया (' फिर माइक्रोफोन पर गृ जता स्वर: भाइयो और बहिनो ! में जब बुलवाऊगा । श्राप बोलिये । भारतमाता की जय ! महात्मा गाँधी की''' জনন ! परिडत जवाहरलाल नेहरू कौ ˆ जय ! शहीदों की''' जय ! प्रान्‍्त के तपस्वी वीर बलिदानों परमेश्वर जी की *' जेय ¦ ` वीर नन्दरयाम जी की''' बीच में एक बोला: क्‍या जय बलवाने को लोडे लपाड़े इकट करवा लिये हैं । क्या बनें इन जयों से ! प्राप भी बोलिये साब! राप क्या हमत के खिलाफ हैं । सि ज = न 6 क




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