बौने और घायल फूल | Baune Aur Ghayal Phool

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : बौने और घायल फूल  - Baune Aur Ghayal Phool
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about रांगेय राघव - Rangeya Raghav

Add Infomation AboutRangeya Raghav

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
[५हाजी ! भेड़ पर ऊन कोई नहीं छोड़ता ।भाइयों, आप क्या कहते हैं। देखिये कांगरेस के जमाने में श्राप इतना बोल छेते थे ? राजा के जमाने में आपको यहु ग्राजादी थी ।*सो क्‍या हुआ ? लगास न बढ़ा दिया, तमाकू का टैक्स नहीं बढ़ा दिया । ऐसे बोलने भी न देंगे, न ऐसे राजा के जाये हैं । दो दो कौडी के टुपिया ('फिर माइक्रोफोन पर गृ जता स्वर: भाइयो और बहिनो ! में जब बुलवाऊगा । श्राप बोलिये ।भारतमाता कीजय !महात्मा गाँधी की'''জনন !परिडत जवाहरलाल नेहरू कौ ˆजय !शहीदों की'''जय !प्रान्‍्त के तपस्वी वीर बलिदानों परमेश्वर जी की *'जेय ¦ `वीर नन्दरयाम जी की'''बीच में एक बोला: क्‍या जय बलवाने को लोडे लपाड़े इकट करवा लिये हैं ।क्या बनें इन जयों से !प्राप भी बोलिये साब! राप क्या हमत के खिलाफ हैं ।सि ज = न 6 क




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now