संस्कृत साहित्य में आयुर्वेद | Sanskarit Sahitya Main Aairvedh

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Sanskarit Sahitya Main Aairvedh by अत्रिदेव विद्यालंकार - Atridev vidyalankarहजारीप्रसाद द्विवेदी - Hajariprasad Dwivedi

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हजारी प्रसाद द्विवेदी - Hazari Prasad Dwivedi

हजारीप्रसाद द्विवेदी (19 अगस्त 1907 - 19 मई 1979) हिन्दी निबन्धकार, आलोचक और उपन्यासकार थे। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म श्रावण शुक्ल एकादशी संवत् 1964 तदनुसार 19 अगस्त 1907 ई० को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के 'आरत दुबे का छपरा', ओझवलिया नामक गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री अनमोल द्विवेदी और माता का नाम श्रीमती ज्योतिष्मती था। इनका परिवार ज्योतिष विद्या के लिए प्रसिद्ध था। इनके पिता पं॰ अनमोल द्विवेदी संस्कृत के प्रकांड पंडित थे। द्विवेदी जी के बचपन का नाम वैद्यनाथ द्विवेदी था।

द्विवेदी जी की प्रारंभिक शिक्षा गाँव के स्कूल में ही हुई। उन्होंने 1920 में वसरियापुर के मिडिल स्कूल स

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विषय-प्रवेश २३ चिकित्सकौ [ शल्योद्धरणकोविदः ] का उनके पाख परहुचनेका जद हमको उल्लेख मिलता है वहां छृष्णात्रेयका नाम चिकित्सकके रूपे तथा गन्धमा- द्नका नाम श्रोषधि्योके सम्बन्धमे भी मिलता है । येद और उपनिषदोंमे भी आयुर्वेदके वचन द्रे जा सकते हैं, परन्तु इस प्रसगमे मैंने उन सबको छोड़ दिया है, क्योंकि आयुव दका इतिहास [ हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रणग द्वारा प्रकाशित ] पुस्तकर्म इनकी चर्चा कर चुका हूँ। इसलिए इस पुस्तकमे मैंने दूसरे कवियोंके साहित्यमें से आयुर्वेकेक वचन चुननेका यल किया है। ध भी नमः पतन्त्यात्मसमं पतत्रिणः इस न्यायके च्ननुसार ही काम किया है।




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