श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण उत्तरकाण्ड | Shree Madwalmikiy Ramayan Uttarkand

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Book Image : श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण उत्तरकाण्ड - Shree Madwalmikiy Ramayan Uttarkand

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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संगं ९५ ९६ ও ५८ ५.५. 1०० १०१ विवरण घनका न ठेना 1 रामचन्द्रका उनका परिचय एवं चरिनके बनानेवारेका परिचय पृखना । “वाल्मीकिका बनाया है! | लव-कुशका कहना एवं मुनि आश्रमका लछोटना। छच-कुशके मुंहसे क्पना चरित सुननेके बाद मुनि और सीताको बुलनेऊे लिये रामका दूतको भेजना | धुनिका, सांता शपथ देने आवेगी, कहकर दूसका छौदाना । ६३७५-२३ ६ यज्ञशाल्ामें मुनिके साथ सीताका आना। वारुमोकि और रामचन्द्रको बातचीत । वाह्मी- कका अनेक प्रकारा दापथ करना) २३६-२३७ सीताका शपथ करना और प्रथवाकनेते सिहा- सनका निकलना | स्रीताकों प्ृथर्व देवीका अपने हाथोंगे उस सिटासनपर बेदाकर, सिंहासन सहित प्रथवीर्स जाना! जारा पुष्पर्वृष्ट | सब्चका उकित होना । रामचर्द्रका साताके लिये रोक करना। ब्रद्मा- का आकर समझ्ताना एच उत्तरक्रोडकी कथा सुनने लिये कहना । २४०-२४) लव-कुशका शेप कथा করনা । रामक्रा यज জন্য গে আযীয विदा करना । कौसल्या, सुमीम्रा एवं केकर्याकी मृत्यु । २५२-२४३ बेकय देशके राजाकों अपने युम्कां गन्धवदेद्ा जीतनेका संदेश लेफर পীএলা। হালড়া লা ओर पुष्कलको भरत साथ गन्धवंदशका मेजना ! ष्टे रे८३-२४५ मरत सादिका राब्धरनदेश विजय कफे अयोध्या लौट आना । হালক্ষা लक्ष्मणके पुत्र अंगद और चउन्द्रऊनु्के लिये नगर-निर्माण कौर उनका. राञ्या- सिपक करना | २४०५-२४ ६ २३२--२३४ २३८-२३९ , २४६-२४८ , सगं १०२३ १०५ १०६ १५५ त ५१ 1०९ १० १११ विषय सुषौ विवरण रामचन्द्रके पास कालका तपम्वीद, रूपमे আনা | হাল और तप्म्वीकी बासचोन। एकानन्‍्तमें बात द्ारपालके रूपमें ढ्ारपर ই বলা । त्तपस्वी रूपकालका ब्रह्माक संदेश कहता | रामका हफ प्रकट करना | २४९-२०० दुर्वासाका रामसे शिक्ष मिल्नेंके लिये লাল কনা ण्व रूद्मणका टहरनेहे लिये कहनेपर क्रोघ करना | रामके पास जाना । रामका आदर दुर्वसाओं भोजन पराना एवं प्रनिज्ञा स्मरण करके शोक करना। २५१ रणर लक्ष्मणका रास भाजा भेव करन करण अपनेको वध “লক द्थ्यि सहना । रामना सभामे घितार। बरसिष्टओ ऋटनेये रासका सट्टणणको ध्थागना । और उत्तका सवर्भ খান জালা । ১৯৭ হালদা অহনা কাজল ছি পুত करनेके लिये लक्ष्मणका २४७८-२४०९ च्ग्धमणका নন নানক इच्छा प्रकर करना | मरतका लव कृशको राज्य देनेकी प्रार्थना । छृर-कुश का राजवा।वि- पक; शन्नुन्नक यहां दृतरा जाना । दूनका शत्रुत्तफे पास १६ चशा হালদচা अपन पुद्नोका হা মনত জব) আম্মা क এ यात्र, करना। एवं रमक प,२ पचक साथमे चल्नका प्राथत क्राश। सु 01 आदि वानर और [उभाषण সার সানা আাগলা एज साथ चल्नेका क ॥ रामका सब : यथावत स्मजान्ग ॥ ५५५१५२५५ रामचद्र अ {कि परसधासयत्रा | २११५-१ रामचन्द्र जटिक परमधाम पथारना । २५१--६१ राप्रायण प्रद्सक्‌। फल! २६१..२६२९




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