राजव्यवस्था सर्वोदय द्दष्टि से | Rajvyavastha Sarvodaya Ddashti Se

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Rajvyavastha Sarvodaya Ddashti Se  by भगवानदास केला - Bhagwandas Kela

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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৮ २ ध পদ तीसरा खंड सर्वोदय में राज्य का स्वरूप ८--राज्य और व्यक्ति एक पक्ष--राज्य स्वयं साध्य है--दूसरा पक्ष--राज्य एक साधन' है--वर्त स्थिति---राज्य में व्यक्ति का लोप--गांधी जी का मार्ग-दर्शन---नार्गाः के कर्तव्य--अधिकारो सम्बन्धी दष्टि-गांधी जी के विचार--वि वक्तव्य । पृष्ट ६६ से ९--पत्तातीत राजनीति -वर्तमान राजनीति ओर दल्बन्दी-घातक परिणाम--पक्षातीत नीति अवश्यकता पक्ष-संचषं का कारण--एक उदाहरण--पक्षातीत नीति लिए विकेन्द्रीकरण की आवश्यकता--विकेन्द्रित व्यवस्था मे मतभेदों कमी---चुनावों पर शुभ प्रभाव--सिद्धान्त-मेद हानिकर न होगा--वि' वक्तव्य | पृष्ठ ७६ से . १०--विकेन्द्रीकरण रौर स्वावलम्बन [१] विकेन्द्रीकरण । राजनैतिक विकन्द्रीकरण--ग्राम सस्थाएं--आथिक वि न्द्रीकरण---विकेन्द्रित समाज-रचना--केद्रीय शासन का छोटी इकाइये व्यवहार--विकेन्द्रीकरण-कार्य का उदाहरण; भारत में भूदान-यज्ञ । पृष्ठ ८२ से 1२] स्वावरूम्बन । स्वावलम्बन का कुछ स्पष्टीकरण--स्वावलूम्बन के | दरीर-अ्रम की अनिवार्यता--शरीर श्रम बनाम बौद्धिक श्रम--उत्पादन साधन सब को सुलूभ हों--स्वावलूम्बी समाज का स्वरूप; खेती और उब् --विज्ञान का स्थान--विशेष वक्तव्य । पृष्ठ ८६ से




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