अनुरागरत्न | Anuragaratn

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : अनुरागरत्न  - Anuragaratn
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about नित्यानन्द जी महाराज - Nityanand Ji Maharaj

Add Infomation AboutNityanand Ji Maharaj

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
ই६८ ६६ १०० १०१ ৩৯, १०३. १०४ १०५ १०६ १०७ १०४८ १०६ ११० १११ ११२ ११३ ११४३ ११४ ११६ ११७ ११८ ११६ १२०वैदिक विद्वान्‌ बताते दें साकार देवता चारपद ऊयी रवि की लालिमा, जयादे इसे मेया उमगी महिमा उस्छपं की सुग्य-मूल विवाद किया है बिगाड़ों फो धिगाई गे सुधारों को सुधारेंगेयतत मारत क्षा रस मगधाउद्धरे म हाय जारहे हर रजनीण निरकुश तूने दिननायक का आस किया हमारे रोने को सुनक छपा एकर দইोलो-वोलो कैसे ्ोगा एेसी मूलो का सुधाररैंग रहा राग फे रय में तू फैसा वेरागी हैऊले उगल रहा उपदेश गढ़-गढ़ मारे ज्ञान-गपोढ़े गुण गान करें रस राज के यश-माजन सुकवि हमारे भारत फीन बदेगा হীন तुकपे होली के हद की खुद्ध~बुल खेलो फा भवक भारत की होली द उरते उद्धत्त उतत उतार धन छी धृल्ि उदाने बाले मत रोवे ललुश्चा ज्ञादक्षे ष्ठ थल मनोहर योत्ती विकराल कलेवर धार घरा पर धृम्नकेतु आयेन विज्ञान फृल्ला न धिद्या फलीप्य फैसे कुदिन अब श्राय गयेकरदे दूर दयालु महेश मुझ पे दारण दु गव पड़ा है भिग्बारी चरन অহী কীনা भारत देशमगल-मूल सदेश मुक्ति-वाता शकर हैकर दानी मनमानीयाँके विदारी की घाजी बैंसुरियाअब तो बने दारिकाधीश श्री जगदीश कहाने घात्मेपष्ट १८९ १८ १८३ १ লিট १६१ १६२८ ०११ २९२ २१४ २२९ २०५৯৯৭ २२६ ररे१ ५२४ २३२० >२य २४६ ০२९१৫२६५ २७२




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now