अनुरागरत्न | Anuragaratn

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
4 MB
कुल पष्ठ :
374
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
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१२०वैदिक विद्वान् बताते दें साकार देवता चारपद ऊयी रवि की लालिमा, जयादे इसे मेया
उमगी महिमा उस्छपं की सुग्य-मूल विवाद किया है
बिगाड़ों फो धिगाई गे सुधारों को सुधारेंगेयतत मारत क्षा रस मगधाउद्धरे म हाय जारहे हर रजनीण निरकुश तूने दिननायक का आस किया
हमारे रोने को सुनक छपा एकर দইोलो-वोलो कैसे ्ोगा एेसी मूलो का सुधाररैंग रहा राग फे रय में तू फैसा वेरागी हैऊले उगल रहा उपदेश गढ़-गढ़ मारे ज्ञान-गपोढ़े
गुण गान करें रस राज के यश-माजन सुकवि हमारे
भारत फीन बदेगा হীন तुकपे होली के हद की
खुद्ध~बुल खेलो फा भवक भारत की होली द
उरते उद्धत्त उतत उतार धन छी धृल्ि उदाने बाले
मत रोवे ललुश्चा ज्ञादक्षे ष्ठ थल मनोहर योत्ती
विकराल कलेवर धार घरा पर धृम्नकेतु आयेन विज्ञान फृल्ला न धिद्या फलीप्य फैसे कुदिन अब श्राय गयेकरदे दूर दयालु महेश मुझ पे दारण दु गव पड़ा है
भिग्बारी चरन অহী কীনা भारत देशमगल-मूल सदेश मुक्ति-वाता शकर हैकर दानी मनमानीयाँके विदारी की घाजी बैंसुरियाअब तो बने दारिकाधीश श्री जगदीश कहाने घात्मेपष्ट
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