समग्र खंड तीन | Samagra Khand 3

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Book Image : समग्र खंड तीन - Samagra Khand 3
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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समग्र 3 /41अनिमेषअवलोकन करता हुआ अपने को पायाघिरा हुआस्वतत्रता के दिव्य तेजोमय । दाभा मण्डल मेविदित हुआ हैकिशुद्ध किन्तु सहज किया का यह सूरत्रपात है यथाजात हैयही सचमुचरहा सब कुछमात तात हैतभी एक साथहो भू सात्‌तीनो करणमन वचन तनसानन्द सादरकिया प्रणिपात है फलस्वरूपविशाल भाल पर चरणरज कुन्दन कुकुम अकित हुआ हैलग रहा हैतृतीय नेत्र उग रहा है




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