उदाहरण माला | Udaharan Mala

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Udaharan Mala  by जवाहरलालजी महाराज - Jawaharlalji Maharaj

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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, ९ ; क्षमाकृति लक मुनि [ क्रोध, मान, माया तथा लोभ--यह चार कपाय भवचक्र में अमण कराते हैं। अगर हम भवचक्त में भ्रमण नहीं करता चाहते और आत्मा को शान्ति देना चाहते हैं तो क्षमा आदि साधनों द्वारा क्रोध आदि कषायों को दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए । क्षमा दारा क्रौध किसे प्रकार जीता जा सकता है, यह वात युधिष्ठिर के जीवन से समभी,जां सकती है। युधिष्ठिर की भांति कोपमा कुर इस धर्मंशिक्षा को तुम अपने हृदय में उत्तारकर सक्रिय रूप दोगे तो तुम भी वर्मात्मा बनकर आत्म-कल्याण साध सकोगे ।. লীঘ आदि को जीतने.का.मागं तौ वतलाया परन्तु कोध आदि के उत्पन्न होने पर किस प्रकार संहनशीलता और क्षमा धारण करना चाहिए, वह बात खंधक मुनि के उदाहरण द्वारा समभाता हूँ। सहन- शीलता सीखने के लिए खंधक मुनि की सहनशी छता अपने लिये आदर्श है । इस आदर्श का अनुसरण करने में ही अपना कल्याण है। | खंबक मुनि गृहुस्थावस्था में राजकुमार थे। वे राजकाज करने में निपुण थे। उनके राज्यसंचालन से प्रजा संतुष्ट और सुखी थी। एक वार उन्हें किसी विद्वान मुनि का उपदेश सुनने का अवसर मिल गया । मुनिवर के उपदेश्ष का प्रभाक उनके जीवन पर पड़ा। उन्होंने विचार किया-- मैं अपनी धीरता और वीरता का उपयोग केवल दूसरों के ही लिये करता हूँ। यह योग्य नहीं है । मुझे अपने इन गुणों का उपयोग अपनी आत्मा के लिये भी करना चाहिए । इस प्रकार विचार कर उन्होंने अपने माता-पिता से अनुरोध किया-- 'मैं आत्मा का श्रेयस्‌




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