बाणभट्ट का साहित्यिक अनुशीलन | A Literary Study Of Bana Bhatta

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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र १ के बाव सिंहनाद ने हे को प्रेरित किया है ।बहि साक्ष्य तथा अन्त साक्ष्य के जाधघार पर भी बाण' का यही श्रमय निश्चित होता है। पहले बहिसादय के आधार पर निक्ष्पणा किया जा रहा है |राजबूडामाणि दीजित अपने फक्मिणीकल्याण महाकाज्य में बाणकी प्रशंसा करते हे । राज्युडमणि का समय १६ वी शताब्दी ई० का प्रारम्म हे ।र ४ वामनभट्टबाण ने वेममृपाल्चरित में बाणा की प्रश्सा की हैं । इनका समय १५ वी शताब्दी ई० है |६ सगादेवी मधुराविजय में बाण की भारती की प्रशंधा करती हैं । गगादेवी का समय ९४ वी शताब्दी ई० का उचरार्द्ध हैं ।খরচ साला आफ माफ मल बम এরা आज: भाव গা जगह: जा हद चमक जहा भा; आयह आय রাজা রাম আরা, বারা বাছা সাহা খারা আর রাডার साल গার जा গার, রা आधा आया हक खाक आयाकः कक 1 111 1 1 1 1 1 1 1 1 ए ए |{ ७०४४९. } 420 8000 5 ०886. #6 उष ४०४ 9150৮ 2০৮ ০৮০ 08591 893-7৮-803. (গুন 2 29025529553) 5 ए01.7, 0১821, ₹- हर्णा0, ६1४५-४७ २- बाण: धुरीण: कविपुगवेष- एकाश्ताः मव्यफलोदयब्री: | अमुन्बमानी ऽ पि गुण परेः विव्याध ममि विजेत य: 11 र च्िणकल्याणः ९ ९ ३- वहो, मुमिकि, पुण र८ 1 ४- जाणादन्ये कवय; शणाः चहुं घएखगच्छ रण । इति जगति श्ढमयशो वामनबाणऽषमा्टि वत्छकृर; ॥ बैममृुपालब रत, उच्छुवास १, पृण २। ५-~ ॐ.) 8 0309 282 2 838৮০ 07 01888108 न &- वाणपाणिपसापृष्टवीणनतिक्वाणहारिणनष्‌ । भावयन्ति कथं वान्ये बाणभटूटस्य भारतीम्‌ ।। मधुराविजय ९।८| | | |




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