भारतवर्ष में जातिभेद | Bharatvarsh Me Jatibhed

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Bharatvarsh Me Jatibhed by क्षितिमोहन सेन शास्त्री - Kshitimohan Sen Shastri

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पे चर || ८ जातिभेदका परिचय चैन ८ राय नि तप न ब्रह्माके मानस पुन्नोंकी व हूं। ब्राह्मण लोग इन्हीं की सन्तति हैं । घ्रह्माके वरुण याग सम्बन्धीय अर्निसे भ्रगुका जन्म है । इसके बाद उनकी सन्तति-धारा चली आदि पर्वे ५ ७-८ । गीतमें भगवान्‌ श्रीकृष्ण कहते हैं कि मैंने गुण-कर्मके अनुसार चातुर्वेण्य की सृष्टि की है । हृरिवंदामें भी कहा गया है कि ग्रत्समदके पुत्र झुनक हुए। झुनकसे ही झोनक नामसे परिचित जाह्मण क्षत्रिय वेस्य बहुतसे पुत्र उत्पन्न हुए । इसी हरिंशमे एक और मतका भी उल्लेख है । अश्रसे त्राह्मण क्षरसे क्षत्रिय विकारसे वैद्य और धूम-विकारंसे झूद्गण उत्पन्न हुए । नाना पुराणोंमें खष्टिकथा नाना भावसे वर्णन की गई है । यहां सबका उल्ठेख करना सम्भव नहीं है । तथापि दो एक और बातोंका उल्लेख किया जा रहा है । वृहदारण्यक उपनिषद्में पहले क्षत्रिय सष्टिकी ही वात पाई. जाती है । १--चातुवंगय सया स्ट गुणकर्मचिभागशणः । ४.९३ २--पुन्रो यृत्समदस्यापि शुनकों यस्य शोनकाः । ब्राह्मणाः क्त्रियाश्चव वेश्या शूदास्तथत्र च ॥ २४ हु४१६-२० 0 ३२-्क्तराद्‌ घ्राह्मणाः सोम्पाः क्रात्‌ ्षत्रियवान्धवाः । वेश्या. विकारतश्वेव . शूदा . घूमविकारतः । भविष्य पर्व २१० ११८१६ . ब्रह्म वा इृदमय्र झासीद एकमेव तदेकः सन्नन्यभवत्‌ तच्छू योरूपमत्य- सुजत १ ४९१




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