मगध | Magadh

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Book Image :  मगध  - Magadh
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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काशो का न्यायसभा बरस्ास्त हो चुकी सभासद चलेंजो होना था सो हुमाअब हम, मुंह क्यों लटकाए हुए हैं? क्या कशमकश है ?किससे डर रहे हैं?फैसला हमने नहीं लिया-- सिर हिलाने का मतलब फैसला लेना नही होता हमने तो सोच-विचार तक नहीं कियाबहसियो ने बहुस की हमने क्या किय! ?हमारा क्या दोष ?न हम सभा बुलाते हैंन फंसला सुनाते हैंदर्षे मे एक बारकाशी आते हैं--सिफं यह कहने के लिएकि सभा बुलाने की भी आवश्यकता नही हर व्यक्ति का फंसलाजन्म के पहले हो चुका है1984मगघ / 17




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