शब्द-कोश | Shabd-Kosh

Shabd-Kosh by श्री स्वामी शिवानन्द सरस्वती - Shri Swami Shivanand Sarasvati

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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प्रट्ठ त-निष्ठा ११ प्रघिकारी रहित ब्रह्मवाद । प्र त-निष्ठा- श्रद्ृंतस्थिति में स्थित । प्रहूं तवाद - वह सिद्धांत जिसके अनुसार एकमात्र ब्रह्म ही सत्‌ है ब्रह्मवाद वेदांत । श्रट्ठे त-वेदान्त- - ग्रद्ेतदर्शन शांकर मत । ग्रह त-सिद्धि- श्रद्चय ब्रह्म का साक्षात्कार एकलीभाव की प्राप्ति । प्र तावस्थारूप-समाधि -- ग्रह तवादियों की नि्षिकत्प समाधि जिसमें ब्रह्माकार छत्ति का भी ग्रभाव रहता है । श्रतिचतनावस्था की वह उच्चतम स्थिति जिसमें ज्ञाता ज्ञान श्र जय की--त्रिपुटी का श्रभाव रहता है केबल एक सन्‌ ही श्रपने स्वरूप में श्रवस्थित रहता है । श्रघमः नीच पतित पामर पापी । झधम-उधारक- पतितों का उद्घार करनेवाला । प्रघर्म धर्म के विरुद्ध कार्य कुकर्म पाप श्रन्याय वेद प्रतिपिद्ध कर्म दुष्कर्म । प्रधिक बहुत विदेष श्रतिरिक्त न्याय में एक नियह रथान । श्रधिकरण -प्रकरगा श्राश्रय श्राघार वह जिसकी शिद्धि दूसरे ग्रथो की सिद्धि पर निर्मर हो अधिपान । झधिकारी- उपयुक्त पात्र योग्यता या क्षमता रखने वाला साधनननुष्रय-संपन्न व्यक्ति ।




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