अद्वैत वेदांत में चैतन्य का समीक्षात्मक अध्ययन | A Critical Study Of Chaitanya In Advaita Vedanta
श्रेणी : साहित्य / Literature

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutDr. Narendra Singh
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
16 MB
कुल पष्ठ :
252
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about डॉ नरेन्द्र सिंह - Dr. Narendra Singh
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)विश्व के आधारभूत सिद्वान्त के एकत्व की स्वीकृति। यह
सिद्वान्त विश्व के अन्तरस्थ एव सर्वातिरिक्त दोनों हे।इस सिद्वान्त का वाहय जगत् से मानव के अन्तर जगत् मेसमग्र रूपेण परिवर्तन |वाह्य विश्व॒ के विराट से अन्तर के सूक्ष्म पूर्वं कातादात्म्यीकरण ।इस सिद्वान्त के स्वरूप की पूर्ण चेतना के रूप में
स्वीकृति जो कि सर्वव्यापक अपरिवर्तनीय तथा चिरन्तन रूप
से वर्तमान है।इस पूर्णं चेतना के अनुभव निरपेक्ष स्वरूप पर विशेष बल
जो कि आनुभाविक जगत् के किसी भी ज्ञात पदार्थ से
सर्वथा असमान है जो बाद मे विकसित होने वाले साख्य
योग तथा उद्वितवेदान्त की चेतना अनुभवातीत धारणाओं केलिए आधार शिला प्रस्तुत करता है।इस प्रकार सभी भारतीय হ্হালী का स्रोत उपनिषद् साहित्य मंदढा जा सकता है ओर यही कारण है कि हिन्दू दर्शन में चेतना कोसमस्त संभवनीय विकल्पों मे प्रस्तुत किया गया है। चेतना को द्रव्य, गुणया कर्म ओर चिरन्तन एव अपरिवर्तनीय की तरह या फिर परिवर्तनीय याक्षणिक या पुनः नित्य रूप से विषयी ओर विषय के विभेद म विभक्त[7]
User Reviews
No Reviews | Add Yours...