शरत की सूक्तियां | Sharat Ki Suktiya

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
122
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)शग्तकी লনা &४गरीबीक्रे कष्ट सागनेकी विडग्चनाने कभी सह्को नहीं पाया जा
सकता, हां, पाया जा सकता ह तो थोडे-से दम्भ और अहम्सन्यताको ।
“शेप प्रश्न
ग़रीबी था माच इच्छसे आवे या इच्छाऊे विरुद्ध आये, उसमे गये
करने लायक कुछ नहीं होता । डसके भीतर दे यन्या, उसके भीतर दे
कमजोरा, उनके भोतर है पाप |
“शेप प्रश्न
आनन्द्र तो नही, वल्कि निरानन्द ही सानो उस (हिन्दू समाज) की
टस सभ्यता ओर भद्रताका अन्तिम खचय वन राया हे ।
। +जशैप प्रश्न
सनुप्यका दुःख ही यदि छुश्ख पानेका अन्तिस परिणास हो तो
उसका कोई मूल्य नही है ।
>जशैप प्रश्न
दुःखी खोगोकी कोड अलूहदा जाति नही है, और दुःखका भी कोई
वेधा हुआ रास्ता नहीं है। ऐसा हो तो सभी उसे वचाकर चल सकते ।
-- देना पावना
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