भगवान महावीर की सूक्तियाँ | Bhagwan Mahaveer Ki Suktiya

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Bhagwan Mahaveer Ki Suktiya by राजेंद्र मुनि - Rajendra Muni

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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धर्म शोर नीति (অল) € ९५ धर्म को समभने वाला सरल हृदयी होता है । २६ जिन भगवान द्वारा उपदिष्ट यह धर्म ही দু है, नित्य, शाश्वत है । २७ अकेला धर्म ही रक्षक है, अन्य कोई यहा पर रक्षक नही पाया जाता । २८ आचरण योग्य धर्म को जानकर के सभी दुख नाश किये जा सकते है । २६ घमं के प्रति श्रद्धासे सातावेदनीय जनित सुखो पर विरक्ति पंदा हो जाती है। ३० आये धर्म का आचरण करके अनेक महापुरुष दिव्य गति को जाते है । ३१ आनानुसार चलना ही मेरा धमं हे । २२९ श्रेष्ठ धमे को जानकर क्रिया करता हुआ ममत्व भाव को नही रखे ।




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