सरल पारिवारिक चिकित्सा | Saral Parivarik Chikitsa

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Book Image : सरल पारिवारिक चिकित्सा  - Saral Parivarik Chikitsa

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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फालेरा या हैजा । ष्् है । अकड़नकी बज्दसे पेरमें बेहद दुर्दे रदनेपर भी यह उपयोगी है । सिकेलि-कोर ३८ ६४, ३०-शरीर बर्फकी तरह ठरडा, परन्तु रोगी वबदनपर कपडा नहीं रखना चाहता; त्वयाके नीचे कीड़ा रेंगनेकी तरह सुरखुरी मालूम होना; ऐंठन। यदि अकड़न या ये ठनमे कयूप्रमसे छाभ न हो तो यह दवा देनी चाहिये, पर पे ठननें दोनों ददाओंमें प्रभेद है । क्यूप्रममें संकोचनी पेशी्मे ( 11607 फ्पउले ) मे अकड़न होती है. अर्थात्‌ हाथ-पेरकी अंगुलियाँ सामनेकी ओर रेढ़ी पड़ ज्ञाती हैं, पर सिकेलिमें प्रसारक पेशी्में (6४/०050ए शाषाइए6 ) में ऐंठन होती है । इसलिये अँगुदियाँ पीछेकी ओर रेढ़ी पड जाती है। छाती पठन होकर रोगीकी साँस रुक ज्ञाना चाहती हे । कार्बो-वेज ३०, २००--यह हिमांग अवस्था अथात्‌ शीत भा जानेकी प्रधान दवा है । नाड़ी लोप, समूचा शरीर . ठण्ड, साँसतक ठणडी, पेर फूलना, हेजाकी अन्तिम अवस्था / के उपसर्गामि यह उपयोगी हैं। चेहश मलिन, आँखे गड़ह में घेंसी, शरीर नीछा,; साँस लेने और छोड़नेकी चाल तेज, सेगी हवा करने कहता है। हमरेजिक कालेगा अथांत्‌ जिसमें खूनके दस्त के आते है, उनमें कार्वोवेज अधिक फायदा करता है। यदि पलोपधिक मतसे फेलोसेडका




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