कप्तान की कन्या | Kaptan Ki Kanya

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Book Image : कप्तान की कन्या  - Kaptan Ki Kanya

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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পপি, १७ कप्तान की कन्या छेते थे उसमे फिर फोरफार करना वै न जानते थे । शुभस्य शीघ्रम्‌ अनुखार वे सपने निश्चयको यविरम्ब का्यके रूपे परिणत करते थे। प्रेरी यात्राका दिन निश्चित दो गया। यात्राके एक दिन पूर्व सन्ध्या समय, पिताने यह कहकर कि, 'छाओ, तुम्हारे अफसरको एक पत्र लिख दू” मुझखे कागज मांगा | मेरी माताने कहा,-- “ऐण्डी पीटोबिच, प्रिंस बी--, को मेरा सलाम छिखना न भूल जाना, मेरी ओरसे लिख देना कि, वे मेरे पीटरकों अपनी ही देखभालमें रखे। मेरे पिताकी त्योरी चढ़ गई | उन्होंने ऊ'चे स्वरमे कहा,- “क्या वाहियात बकतो हो ? में प्रिख बी--, को क्यों छिखने लगा £ “क्यों, अभी तुम्दीं तो पीटरके अफलरको पत्र लिखनेके लिये क रहे थे | “हां, तो फिर ?* “तो फिर क्या, प्रिस बी--, द्वी तो पीटरके अफसर हैं, पीटर सेमेनोरकी रेजोम्रेण्टमं ही तो सारजण्टके पद्‌ पर नियुक्त हुआ है । “नियुक्त हुआ है ! होगा। पीटर, सेण्टपीटसंबर्ग नहों ज्ञा रहा है, वहां जाकर यद्द क्‍या सीखेगा ? धनका सत्यानाश करना, विछासिताका अभ्यासों बनना, गुण्डेपनका जीवन विताना-- नहीं, पीटलेबगे जानेकी कोई आवश्यकतनहीं है | उसे ऐसो जगदद




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