मद्यकालीन भारतीय संस्कृति | Madhyakaalin Bhartiya Sanskriti

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Madhyakaaliin Bhaaratiiy Sn’skrxti by

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( १२ ) द्वितीय श्यास्यान- साहित्य ५७-- ११८ संस्कृत साहित्य के विकास की प्रगति ५७; तत्कालीन साहित्य के कुछ उत्कृष्ट काव्य ५८; सुभाषित-संग्रह ६१; गद्यकाव्य ६१; चंपू ६३; नाटक ६३; ध्वनि, अलंकार आदि साहित्य के अंग ६५; तत्कालीन काव्य-साहित्य का सिहावलोकन ६६; व्याकरण ६६; कोष ६७; दर्शन ६८; न्यायदर्शन ९९; वैशेषिक दशेन ७१; सांख्य ७२; योग ७३; पूवेमीमांसा ७३; उत्तरमीमांसा ७५; शंकराचायं ओर उनका अद्रेतवाद ७५; रामानुज ओर उनका विशिष्टाद्रेत ७६; मध्वाचायं ओर उनका द्रेतवाद ७७; चारवाक ७८; बौद्ध-दर्शन ७८; जेन-दर्शन ७८; तत्कालीन दार्शनिक उन्नति का सिहावलोकन ७९; यूरोपीय दर्शन पर भारतीय दर्शन का प्रभाव ७९; ज्योतिष शास्त्र की पूवंकालीन उन्नति ८१;६०० ई०--१२०० ई० तक का ज्योतिष साहित्य ८२; फलित ज्योतिष ८४; भारतीय गणित शास्त्र ८५; अंक-क्रम का विकास ८६; अंकगणित ९२; बीजगणित ९२; रेखागणित ९३; त्रिकोणमिति ९४; आयुवेद का साहित्य ९५; शल्यविद्या का विकास ९६; सर्पविद्या ९८; पशु-चिकित्सा ९८; पशु-विज्ञान ९९; चिकित्सालय १००; भारतीय आयुर्वंद का यूरोपीय चिकित्सा पर प्रभाव १००; काम-- शास्त्र १०२; संगीतसाहित्य १०३; नृत्य १०४; राजनीति १०४; क्रानूनी साहित्य १०५; अथंशास्त्र॒ १०९६; प्राकृत साहित्य का विकास १०८; मागधी १०८; शौरसेनी १०९; महाराष्टी १०९; पैशाची ११०; आवंतिक ११०; अपभ्रंश ११०; प्राकृत व्याकरण १११; प्राकृत- कोष ११२; तामिल ११३; कनड़ी ११३; तेलगू ११४; शिक्षा ११४; नालंद विश्वविद्यालय ११५; तक्षशिला विश्वविद्यालय ११६; शिक्षा का क्रम ११७। तृतीय व्याख्यान--शासन, शिल्प और कला ११९--१५५ शासन-पद्धति ११९; राजा के कतंव्य १२०; ग्राम-संस्था १२०; दंड १२२; स्त्रियों की राजनीतिक स्थिति १२३; शासन-प्रबंध १२३; आय-व्यय १२५; सार्वजनिक कायं १२५; संनिक-प्रवंध १२६; राजनीतिक स्थिति.




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