स्वतंत्रता आन्दोलन में बाँदा क्षेत्र के स्वतन्त्रता सेनानियों का योगदान | Swatantrata Aandolan Mein Baanda Kshetra Ke Swatantrata Senaniyon ka yogdan
श्रेणी : इतिहास / History

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Add Infomation AboutArun Kumar Mishra
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
215.29 MB
कुल पष्ठ :
368
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)बाँदा जनपद की भौगोलिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमिउपयोगी है। यमुना के अतिरिक्त अन्य नाले और झरने तथा छोटी मोटी
नदियाँ यमुना की सहायक हैं। इन सहायक नदियों में सबसे महत्वपूर्ण
केन, बगाई, पैसूनी तथा ओहण है। बाँदा जिले की सहायक नदियों में
यमुना को सबसे अधिक पानी देने का कार्य केन द्वारा ही होता रहा है।
बरसात के इन दिनों में इनमें जल प्रवाह तेजी से होता है किन्तु जैसे ही
बरसात समाप्त होती है, वैसे ही इनके प्रवाह की तीव्रता कम होने लगती
है। गर्मी के दिनों में इनमें से अधिकांश सूख जाती है, यहाँ तक की मई
के अंत तक आते-आते केन तथा बगाई जैसी नदियाँ भी छोटे-छोटे
नाले का रूप धारण कर लेती है। केन की तलहटी में प्राय: भूरे रंग कीबालू पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहती है, जिसमें विभिन्न रंगों के अन्य
छोटे-छोटे रोड़े भी मिले होते हैं। इसके अलावा प्रतिवर्ष बाढ़ की पानी में
क्वार्ट्स चट्टाने घसीट कर केन के पानी में आती रहती है जो चिकनाई
युक्त होने के कारण शोभा की वस्तु बन जाती है। स्थानीय बाजार मेंव्यापारी इसे विक्रय के लिए उपलब्ध कराते हैं केन की तलहटी में ..ग्रेनाइट पत्थर भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। जो आर्थिक दृष्टि से
उपयोगी है। इन सबके अतिरिक्त केन नदी का दाहिना किनारा ऊँचाई.
पर होने के कारण इसका बांया किनारा ढलुआ है, जिससे भूमि कटाव
पैदा होता रहता है। नौकाचालन के लिए केन नदी उपयुक्त है लेकिन1878 तक जिले की नदियों पर नौकायान तथा नौका सम्बन्धी यातायात...अपेक्षाकृत कम था।.... * ड्रेक-ब्रौक मैन, डी0एल0 - बाँदा गजेटियर भाग 201 , इलाहाबाद, 1909 पू-13 पर करवही पृ-13
वही पृ-14स्वतन्त्रता आन्दोलन में बाँदा क्षेत्र के स्वतन्त्रता सेनानियों का योगदान (1857-47) ......... 5...
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