स्वास्थ्य सरिता | Svastya Sarita

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
70
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)नीबू काटकर निचोड ल ।१६-विपमज्वंर (}\{914118)--
विपमज्वर मे नींबू का प्रयोग श्रति उत्तम
ই | इसमें निम्वू फल क्वाथ बनाकर देना
चाहिए। सिसली टापू में मलेरिया के
ऊपर बहुत अ्रवसीर प्रयोग माना जाता
है 1 वहा पर बहुत उग्र काफी वनाकर
इसमें नीयू रवरस मिलाकर प्रयोग करते
है । सिनकयोना कड की दाल मे जसे
गुणहै वैते ही नीच के कटु पौष्टिकि
तत्वों में होते है ।मलेरिया से व्विनीन देने से उत्पन्न
1410८708 हटाने के লিন লীন
स्वरस देते है ।१७-विपविकार--१०-१२ नीवू का
रप निकाल केर उक्तम थोडी गक्कर
मिलाकर पीने से श्रफीम एव सपविपमे
लाभ होता है ।१८-रक्त-पित--में मसूझो से खून
श्रते परजलमे स्वरस मिलाकर জুলি
कराते है।१६-त्वक् रोग--कुछ दिन नीघ्रू रस
देते रहने से काफी लाभ होता है ।२०-तिलली--इसमे. नीथू
प्राचार दे ।
बाहय सेवन -२१-मुख की काई--लोघ्र और
हल्दी नीयू के रस में मिलाकर सात दिन
उबटन कराने से मुख की भाई नष्ट
होती है ।काअगस्त १६६९३१७हरेकेरग को निखार के निएताजे दूध में नीवबू का रस निचोड़ कर
रात को था प्रात काल उबटन के रूप में
प्रयोग कराते है। इससे चेहरे का रग
निख्तऋरता है एवं खूबसूरती बढती है ।
उसे (19८८11८ मे मिलाकर भी प्रयोग
कर सकते हैं ।२२-वाल भडना--नींबू स्वरस से
श्रामने पिसवाकर २१ ছিল वालो पर
लगा।वे इससे वाल भडने बन्द हो जाते है२३-लक रोग-त्वचा के दद्र
श्रादि अनेक रोगो में नीवू का रस चमेली
के तेल में मिलाकर मालिश करना
उपयोगी ह 1 इसके श्रत्तिरिक्त नीबू
स्वरस से निर्मित श्रनेक श्ोषधिया জল मे
प्रयुक्त होती है}হা £ লীলা, मुहागा १ तोला,
गन्धकं १ तोला, कत्था १ तोला कुटज
त्वक १। तोला सवको कूट छानकर
नीबू के रसमे घोटकर बेर के बराबर
गोली वनाकर जल मे धिस्रकर लगाना -
चाहिए ।ग्रकेला नीवृ् स्वरसत भी यदि कुच
दिन लगाया जाय तो दद्र शीघज्न नष्ट हो
जाता है ।बस्ति द्वारा-२४-अतिसार--तीवू के रस को
जल में मिलकर बस्ति देने से श्रतिसार
में लाभ होता है।स्वास्थ्य सरिता
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