हिन्दी साहित्य के इतिहास का एक अध्ययन | Hindi Sahitya Ke Itihas Ka Ek Adyayan

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Hindi Sahitya Ke Itihas Ka Ek Adyayan by विनीत - Vinit

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( १३ ) उसके विषय में भत है, भ्रविकांश प्रक्षिप्त, वाद में मिलाया हुआ है| यह उसकी भाषा की सिन्‍नता उसने पर सिछ हो जाता है। आचाय शुक्ल जी को বীজ करते हुए इस काव्य का कुछ अंश मिला था, जो भुल ग्रंथ कक भाग कहा जाता है। दसमें चित्तोड के वम्भाण द्वितीय के यु को दम है, जिनम्‌ अनेक युद्ध उन्होंने নালা হী जड़ थे, जिनका <स 2৩৩ ४८६० है | अनतएन प्रनन्ध रूप मे ভু আদ अ्रथस रनों मिलती है। उसी को १७ वीं शहाब्दी में तत्कालीन चित्तौड के मद्ाराथा की आशा से पु कराया गया, ऐसा अलुभान क्रिया जाता है) इनकी भाषा देश-भाषा का, प्रान्‍्म्मिक, अपयूश के अधिक निकट का, राजस्थानी ৫৯ शब्दों की अधिकता लिए. ছ্০্এনধিত্ব। छिलमिल रूप है| बीसलदंव रासो, नरपपि न्‌।ख्ह्‌ नरपति नाल्‍्ह अजमेर के राजा विभ्रद्राज चतुर्थ (चीखल देष) का खम्कालीव कत्रि था। वीसले देंव इतिदह।स-प्रलिद्ध, चीर है, जिसने रुरक का उस समय ॐ कर्‌ मुकावला किया थाओर उन्हे भगाया था। इन्दोंने और भी अनेक सफल युद्ध विदेशी श्राक्रान्ताओं से कथि | दनक र(ज्थ-जिस्तार दविभाजय से विंध्याचल तक था | १२२० का इनका पुक शिलालेल दे जिससे लिखा है, इन्होंने आय देश से सुखलमानों को भभा। कर इसे,फिर आये देश बचाया था। नरपति লা বহুল प्रसिष््‌ वीर के प्रेम का चित्र इस छोटे से भीत॑- काच्य में उत्तारा है। इसके सब छुन्द परस्पर स्व्तलक्षुक्तकेद | इसये ७ खण्ड में पहिले में २४ छुन्दों में वीसल 3व के जेसलमेर के राजा भोज की छडकी राजमंती के साथ न्‍्याह का वर्णन है, दूलरें में, ८६ छुत्दों में उससे ७5 ९ चीलस दव के विद्या (< सीसा) चले जाने का और वहां एक वपे रघ्नेका चर्खनद; तीस्रेमे १०२ न्दम राजभमतीके विरह का वर्णन है - और चोथे मे भोज अपनी पुत्री को घर ले जाता है और फिर श्राकर चीसस2े उसे वायश्च लाता द) इसकी मापा पिष्ल (काव्य भाषा) के निख्मों सेस्ववंम राजस्थानी न्द লী স্পেন लिये डिंसत् हे 1 ভবন 8] এ पुनी छिन्दी পট




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