अकबर की शायरी | Akbar Ki Shayari
श्रेणी : इतिहास / History

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
9 MB
कुल पष्ठ :
342
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)अकबर की शायरीदिल मेरा जिससे बदलता कोई ऐसा न मिला ।
बुत क बन्दे मिते अह्लाद का बन्दा न मिला)
वर्मे यार्रोसे फिरी वादे वदारीर मायूस ।
एक सर भी उसे शमादय सौदा न मिला॥
गुल के ख़्वाहाँ * तो नजर आये बहुत इत्र फ़रोश*तालिवे« रम्ज्* मये बुलबुल शैदा*° न मिला ॥
वाह. क्या राह दिखाई है हमें मुशिद११ ने।
कर दिया काबे को गुम ओर कलीसा** न मिला ॥
रंग चेहरे का तो कालिज ने भी रखा कायस ।
रंग वातिन)+ में मगर बाप से वेटा न मिला ॥
सय्यद् उद्न जो गजुट*४ ले के तो लाखों आये ।
शेख क़ोरान दिखाते फिरे पैसा न मिला॥
{ दोशियासे मे तो एक एक से सवा हैं “अकबर” ।
। मुझको दीवानों में लेकिन कोई तुम सा न मिला ॥(१) मृति (२ ) मजलिस ( ३ ) वहार कौ इवा ( ४ ) नाउम्मीद
( ५ ) पागलपन (९ ) चाहने वाले (७ ) वेचनेवाल्ला ( ८ ) चाहने
वाला (&) भेद (१०) भ्ाशिक्र (११) गु (१२) भिज
( १३ ) छिपा हुआ ( १४ ) गवर्नसेन्ट का अखबार ।
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