अर्हत आदिस्वर | Arhat Adishwar 

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Arhat Adishwar  by मुनि बुद्धमल्ल - Muni Buddhamll

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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सर्ग पहला मद्धला चरण प्रथम भव : धनसेठ ঘমঘীন ्राचाये का प्रागमन मृनिचर्या धनसेठ का विपाद गुरु दर्शन के लिए प्रस्थान सन्तो के कार्य-कलाप घत का दान और सम्यग्‌ दर्भन की प्राप्ति धर्मघोष झाचार्य का उपदेश; धर्म के प्रकार दान : ज्ञानदान-अ्रभयदान जीव के प्रकार धर्मोपग्रह दान शील-धर्मे तप-धर्म निर्जरा के भेद दूसरा भवन्युगलिया जीवन कर्प वृक्ष तीसरा भव : सौधर्म देवलोक में देव : महादिदेदह कषेत्रे में महावल १९ সানা শন হালষল হ্যা বীমা মল ল্ঘলি লাল मेधी क्र को प्रतियोघ সলালদাঙা ঘশিলমনি হন प्रमा शल মহিন अनुक्रप्र © + वी রো ^< ^< ~ ११ ११ ११ १२ १२ १४ १४ १५ १५ ५१ १0 क्षणिकवादी शतमति कथन परिणामी नित्यवादी स्वयं-बुद्ध कथन मायावादी महामति कथन द्रं तवादी स्वयंवुद्ध कथयन महावल नृप कथनं स्वयंवुद्ध द्वारा कथित इतिहास दण्डक राजा पाँचवा भव : ललितांग देव अ्रमामिका ललितांग की भावी पत्नी धर्म-देशना नारकीय दुःख वर्णन तिर्यण्च दुःख-वर्णन मनुष्य दुःख-वर्णन देव दुःख-वर्णन ललितांग देव के च्यवन चिन्ह छठा भवः महा विदेह मं वच्रजंघ वखरजंघ कौ जातिम्मरण নল নী তুল রাহা হা सातर्वा भव-युगलिया आदवां भव: सौधर्म देवलोक में नवम भव: जीवानन्द रवय পপি कनके कक “>क, ख्वद्यधनन नंगंदाद गा सममन সত হর कम কবজ ५११ न्त 4१ =)




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