एक भेट (नाटक) | Ek Bhet (Natak)

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Book Image : एक भेट (नाटक)  - Ek Bhet (Natak)
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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»राजनाथ--आप तो गिन कर रख लेते दै महीने मे, भटा आप क्यों न शन्त होगे १दिवाकर--न्‌ मत्तक पर हाथ पटककर ] ओफ ! [ झ्िवनाथ से ] जाओ वेटा तुम धर जाओं ।[ शिवनाथ घर जाते हैं. ]दिवाकर--यह सब क्‍या ९राजनाथ--आये और झाइने छगे आइैर मुझ पर, भेंस छाया में वॉध दो, गोवर-कड़ा साफ कर दो। क्यो? में कोई गुखम हैँ इनका ९दिवाकर--अरे !राजनाथ--मैं भी नहीं उठा, तो ऐंठ गये । बोले, शाह कहों है ९ मैं कोई आ छगाने वाला हु, झाड़ू पूछे नौकर से ।दिवाकर--अरे वेटा, वुम्दारा वड़ा भाई है, उसमे धुरा दी स्या कह दिया उसने | तुम्हारे लिए कया नहीं करता वह ९राजनाथ--आप भी पिताजी भुम पर लीपने लगे। अभी उस दिन आप ही न माने । मैस ने मार ही दी पूँछ, कितना गन्द्रा हो गया था मेय सूट ।दिवाकर--घुछा भी तो दिया था तुम्हारे इसी भेया ने | तुरत दे दिया था पहनने को अपना, आर स्वयं बस यो ही ।राजनाथ--तो कोई बात कहने के पहले टाइम और मूड भी तो देख लेना चाहिए ।दिवाकर--इसका च्या अर्थ ?राजनाथ--अर्थ स्या, मेरे पास आया था मेरा एक क्लासफेलो-- दिनेशचन्द, जिसका फादर डिप्टी कलेक्टर है। उन्हें आता देख पूछ चेठा, ये कोन ९दिवाकर--अच्छा !राजनाथ--ये आ रहे थे धोती-कुरते में थ्ड क्लास पोजीमन में,




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