नयी तालीम | Nayi Talim

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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के विकास को संयोग पर छोड देना एक मारी मूल है । टिल्ट्रंप का बहना है कि बालक को हस्तता का पूर्ण भर सही प्रशिक्षण मिलना चाहिए, क्योकि यह सामे-कौशल हो देशिक श्रौर व्यावसायिक सफलता को प्रमावित बरता है । इसी प्रकार बीले का विचार है दि सानव-शिशु में वायें था दायें हाय की प्रधानता जन्म से नहीं होती । अत हस्तता के चुनाव में बाठक को स्वतंत्र छोड देना भूल होगी भौर बालक के प्रति भन्याय होगा, क्योकि स्वनम छोड देने से सम्मद है कि दह गलत हाय का चुनाव कर ले या फिर दोनो ही हाथ समान रूप से प्रधानता को प्राह्त कर ले, जब कि यह भी ठीक सही । बयोकि कोई भी बासक दोनो हाथों पर समान रूप से निय्रण प्राप्त नहीं कर सकता है । हिल्ड्रंप ने इस थात पर जोर दिया है कि केदरू कुछ प्रतिभावान चालक ही दोनों हाथो से समान कुशरूता दे काम बरने में सफल हो सकते हैं । चालक में किस हाथ की प्रधानता होगी, इसका निर्णेप जल्दी ही हो जाना चाहिए। यदि लम्बे काठ तक बालक मे हस्तता का निश्चय नहीं होता है भौर वह भपने दोनों हाथो का ( कभी दाय का कभी बायें का ) प्रयोग समान रूप से करता है तो इससे बच्चे के सामने कई वार भनेक समस्याएं पैदा हो जाती हैं। कार्य करते समय एक उलझन, भनिश्चितता शोर सुरक्षा को भावना उसे थेरे रहेगी । सम्भव है वह कई बार प्रसमजस में,पड जाये श्रौर कांये को ठीक प्रकार से पूर्ण कौशरू मे साथ न कर सके । इस सबका प्रभाव उसके ध्यक्तित्व पर पता है। दिल्ट्रंथ के मनुसार उसमें व्यक्तित्व सम्बन्धी ध्नेक दोप भ्ोर समस्याएं जन्म से सकती हैं, जसे--जिद्दी होना, स्नायविक कमजोरी, मकारासमक प्रवृत्ति, लिखने-पढने में दोपद्दीनता की मावना श्रादि । इस सबसे यद्द स्पष्ट है कि बालक में हस्तता का निर्धारण जह्दी हो हो जाना चाहिए, ताकि उसमे स्थिरता, सुरक्षा, हृढता भौर निश्चितता की भावना का जर्म हो भौर व्यक्तित्व का समुचित विकास हो सके । इतना ही नहीं, बल्कि इसमें बालक एक हाय का प्रयोग करने में प्रवीण हो जायेगा तथा भषने दूसरे हाथ को एक सहायक हाथ के रूप में प्रशिदषिठ कर सकेगा । फिर दोनों हाय एक टीम के रूप में बहुत हो कौशल व निपुणता के साय कार्य करने में सफ्ल हो सकेंगे । वाम-हस्तता : एक दोष भवतक के भष्ययन से यह स्पष्ट रस से माना जा सकता है कि चालक में बाम-दस्तता का होना उसके विकास मे एक बाधा है 1 दाहिने हाथ को | [ सयी सालीम




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