मुहब्बतनामा | Muhabbatnama

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Muhabbatnama by अमृता प्रीतम - Amrita Pritam

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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এপ काम कार कान লী শা सकती है। और इस तरह कोई इंसान आशिक ये रूप में--शिसी इंसानी मूरत में से खुदा का दीदार पा तेता है । यह सिर्फ मुहब्बत होती है--जिसकी शकित के आगे समाज बी ` रीतियो भौर परम्पराओं में सिपरे हुए छोटे-छोटे विचार, सचमुच वहूत छोटे और बीने हो जाते हैं। और जिसके লামন- লী, লহলী আয मजहबो के कायदे-कानून--वाल-पोवधियों जैसे हो जाते हैं । पंजाब के एक लोकगीत थी एक पक आशिकों वे वेदे मौर कुरान के: समान हैं---/दशक आहंदा--मेरा शौफ वलिया नू, जिहनूं हारी मारी की जाणे”! और ऐसे जब कोई इंसान वली बनते हैं, हव सीर सच या कलमा वहीं पढ़ने हैं। तब उनमे से ने विसीया मन दूसरे के मत से झूठ वोल सहता है, न॑ किसीवा तन किसीके तने से मूठ बोल सकता टै ~~ ; षष्क्ट्उा ९, मभौ वर्नियों--ैगस्बरों को है, इसे साधारण आदमी बया जाने हक का कतमा आशिक पढ़ते १३ 4




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