संस्कृत सूक्ति संग्रह | Sanskrit Sukti Sangrah
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1 MB
कुल पष्ठ :
55
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)ननह कक आन कलर पाए करच-वसस्तःवसम्त ऋतु प्रकृति के भानस्द की ऋतु है । इस ऋतु पर संस्कृत के सभी
कंबियों ने लिखा है । नीचे उद्धृत श्लोक “वाह्मीकि-रामायण' के हैं । राम लक्ष्मण से
बसचत्त की शोभा का चर्णन करते कह रहे हैं |सौमित्रे
काल: ।
गन्धवान् सुरशिमसी
जातपुष्पफलडुम: ॥१॥पश्य. रूपाणि. सौमित्रेवनान्त पुष्पशालिनाम् !
सुजतां पुष्पबर्षाणिवर्ष लोममुचामिव ॥र॥प्रस्तरेष च......विविधा: काननदुसाः ।
वायुवेगप्रचलिताःपुष्पेरवकिरन्ति गामू ॥ ३0१पत्ते: पतमानेश्च
पादपस्थैश्व . मासतः ।कुसुम: पश्य. सौमित्रें
क्रीडतीव समन्तत: 11४11विक्षिपनू विविधा: शाखानगानाँ कुसुमोत्कटा: ।
सास्तश्वलितस्था ने:षट्पदेरनुगम्यते . ४11
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