वैज्ञानिक चमत्कार | Vaigyanik Chamatkar

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Vaigyanik Chamatkar  by विमलदास कोंदिया - Vimaldas Kondiya

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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रेडियो १ রি है । इसी प्रकार का एक विद्यत-चुम्बक जहाज़ पर चाल्सं ধু जअंक्सन 1 क्सन ( (४४1८5 ष्ट}: ) के पास था । जहाज़ के लोगों डाक्टर जैक्सन के पास इस अद्भुत वस्तु को देखकर उसके बारे में पु्धवाल्ु करता आरम्भ किया | एक महाशय ने पूछा कि गेडरी फे तार में बिजली को फेलते कितनी देर लगती हैं। डाक्टर जेक्सन ने उत्तर दिया कि तार चाहे जितना लम्बा क्‍यों न हे उस सारे तार में विद्यन का संचार दो जाता हैं। जेक्सन ने यात्रियों को प्रयाग करके विद्युत्मंचार का चमत्कार दिखलाया। इन दर्शकों में मोल भी था। सोर्स अपने पूर्व विद्युत सम्बन्धी ज्ञान की सहायता से नरन्‍्त जेक्मन के प्रयोग को प्रथं सममः गया श्रीर्‌ विचारे करने लगा जि वदि णयं संकेत वना लिये लोय तो उनके हारा समाचार भेजे था सक्त | इस विचार पर द्द कर याड पर রা रे हरी ससन ১ के कोड सूर ১ ना क्तः {रर {= सोचने श +#० स নত सरकांय साचता ছল किया | साचन २ न्द्‌ व সপ সুপ तार र सम्पन की সর छान ५ द খপ বা স্পা জি লি লন লচস্বন त्र स्‌ थी सनत লাল হল भ्वान्‌ ४ ६७ ॥ [च ২৬ সি मृतं | न्यया द नने सरव यन शटा जु = কুলে म्य তল হা ৭ टी प्रा এ, छिद्र লিল হী কলে তে হকি হা জিনা হন্যালোকি কা ध््ादाकाह छा चिपय = 4 भ भने क ध क ५ पर হলে ভন লী পরছে বাহ হাহ লি তল शाविध्ात्ट ेे स्थान शक भेल পতি ग কক কী षि ६ রর & { ५ ११ कतक कृनत ज्ज भ कुं न বা পিল, ०6 ५६९. +^ { ४1418 ) मृश লালু যন শি তা?




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