समन्वय श्रीमद्भागवत | Samanvay Sreemadbhagvat

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अथ #श्रीमड्रागवतकी विषयसची ४६: :, 1५. अथ प्रथमस्कन्धः। ॥ अध्याय. ˆ - ' विपय पृष्ठा ५१ मङ्गलाचरणनैमिेयोपाख्यान.पूतागमन ओर शोनकादिक ऋषियों का प्र. १ २ सूती काः उत्तर तहँ मगवदुणानुवणनसवन्धी उपोद्घात, न ३ पुरुष आदि अवतारों के चरितका वर्णन, अवतारकथा के प्रश्न का उत्तर, १३ / ४ तपादिकत्तेव्याप्तनी का अप्तेतोष'तथा मागवतके आर्म का कारण. १९ ५ / व्यापनीके चित्तका समाधान हेनि के निमित्त नारद्नीका सव घें ते मगव- ভুদা का परष्ठत्ववणेन करना. ~ ~ „^~ २६ ६. नारदी के पूषैनम्म का वृत्ता्त वैन, “^ „~ „^ २९ |' ७ भागवत कै आरम् मँ अश्वत्यामा का निग्रह्‌ वणन. .... ३४ ८ अश्वत्थामा के अन्धस परीक्षित्‌ की रक्षा कुन्तीकृतस्तुति, युधिष्टिक्ृत शोक... ४१ ९, मीप्मङन युधिष्ठिर को ध्ौपदेा, मगवत्सुतिभीष्मनी का मोक्ष ४८ १० कृतकाये मगवानूका जियो पे सतुति करयिनतिहुए हतिनापुरे द्वारकाकोगमन. ९५ ' ११ -बन्धु सहित भगवान द्वारका परे, द्वारका वातय ने मगवान्‌ की स्तुतिकी. ६० | {| २.परीक्ित्‌ राजाके जनमकावणैन . „~ „^ ^ १६ || १३. परी्ित्‌ के राज्यामिेक का महोत्सव, विदुरे वाक्य ते धृतरा का ममन. ७० १४ महा उपद्रवो ते युधिष्ठिर को -घवड़ाना तथा अञ्न के पुल प, मगवःन्‌ ॥ ], ममन बभैन्‌, - ˆ «+«« ভা, 2 সি १९ कलियुग काअवेश देख युधिष्टिरादि ग को गये. - 4০৮ এ | | १६ -परीकषित्‌ राना का दिषिजय वणेन) पृथ्वीधर सम्बाद | १७.२े प्रतापी राजा को वराह कि निस ने कलियुग के भी दण्ड दिवा. ९६ | “॥ १ ८--आक्णके पुत्र का राजा परीक्षित्‌ को शापदेना और उसका अनुग्रहरूप होना. १०६ | १९.योगिये ते देशिते परीक्षित्‌ के समीप शुकेदेवजी .का पथारन, (०८५ पु ८ ২ 5. & সবি সথনজ্ুল্ন ॥ , , | তত 'अथ हितीयस्कन्धः । ! १-कीसेन, अवण आदि से भगवान के स्यूछ रूप में मत की धारणा का वर्शन. ६१९ |




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