सामवेद संहिता | Samved Sanhita

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Samved Sanhita by रामस्वरूप शर्मा गौड़ - Ramswaroop sharma Gaud
लेखक :
पुस्तक का साइज़ :552.79 MB
कुल पृष्ठ :961
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रामस्वरूप शर्मा गौड़ - Ramswaroop sharma Gaud

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दा नर पक खत .धलग क. विद 4 विकसित. कि... कि विवि -..पकिलि किस कि. विवि 2 मििक अर किक नह उ्लितिक के..लीडिकि की है हर्ट हु... हक. हि ई कु म् ही कुल्यम. कक कक कवरफम्कशाल दल जान कक कक के अयादिनजलिरवटटिटिककजट देकर 1 अस्मयज्ञाय संचन्तु यश्ञाजूमावाय च मवन्तुः इत्यथ । आप ने है. 4. अस्मत्सस्वास्घन पातये पानाय च दा सुख मवन्तु डे | तथा. दाम डर 1 | ग आभिष्ये मवन्तु दिव्य जद हमारे यश्कके अड् वर्म सः पीतय दो अग्निम उपस्तुषहि उपत्य स्तात कुरु। कादराम कि मेघाधिन सस्थ ह घर्माणम सत््यवचनरुूपेश्ण घर्मेणोपंतं दूव दोलसमानस अर्मावसालनम है अमीवानां 1हुसकामा राजणा वा आातकम ॥ १२ कै | दाचुआंक नाशक आग्निम अग्निदेवकों उपस्तुहठि उपस्थित ह १६ # सामवेद्संडिता-आग्नेय पे % दकसमकाकाभलकरकॉलिकशन ३२३४ १ श्र इर. कक विमर्निमुप स्ठाहटि सत्यघम हर डै देवममीवचातनम्‌ ॥ है लि. खाए के अथ द्वादशी । मेघातिधिकापे । है स्तातसंघ अध्यर ऋत हे उपासकों अध्वरे यज्ञमें कविम्‌ सेघावी सत्यघमौणाम सत्यवचन रूप धर्मेसे युक्त देवम चोतमास अमीवखालनम होकर स्तुति करो ॥ १२ ॥ हे. ₹ २ शरशे्श्श्े १ रे 3१२ ५ के गे शं नो. देवीरमिष्ये शं नो भवन्तु पीतये। रेड ३१ २ 7. शं योरभिखवन्तु न || कल. अथ अयोद्शी । सिन्घुद्धी पो 5स्वरीपों या सूत आसो वा ऋषि । न है. अस्माक पापापनादद्वारण दा सुख मवन्तु। दवा दब्य भाप अभिष््स. नः शस्र हमारे पाप दूर होकर कु त्र प्राप्त हो देवी आप न हुए रोगांकों दुर करें नः . | आानि खबन्तु हमारे ऊपर असुतरूपसे टपकें॥ १३॥




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