बाजीराव पेशवा | Bajirav Peswa

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Book Image : बाजीराव पेशवा  - Bajirav Peswa
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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यह ता उनका बढप्पत है । वे हमार पूजनीय हैं ।” चिटदिस की प्रोर देखता हुआ क्रोध म मरकर बाजोराव बोला- “यह ख गोता भ्रमी दा प्रभी महाराज छत्रसाल के पास मिजवाधा शोर हस्कारे के साथ बहलवाओा कि मैं आ्रापकी सवा मे हाजिर हो रहा ह-” हरकार को शोर হন कहा- इसकं झाराम को व्यवस्था करो 1” हरकारा मुजरा घरता हुपा पीछे चला औ्लौर तम्बू सं बाहर निकल गया |बिटनिस ने खरीत का गाय कर लाह वी मुगलौमे डालकर कोथली मे ब द क्या मोहर लगाकर महाराज छत्रप्ताल के पास पहुचान का झ्रादेश थोड रूमथ तक बाजी राव ऊहापोह मे रहा फिर निश्चिय कर कहा- श्रता को लिखा कि इदौर मे ठहरने स काम नहीं चलगा । मैं प्रुदेलखण्ड जा रहा हू । मेरे से सम्पक रखें झौर पीछे रहन का प्रयासकरे ।' विटनिष न खोता तयार करक पड़त चिमनाजो प्रप्य को मिजवाने की व्यवस्वा करत ।पडत बाजीराव उठ कर तस्त्र म घूमने लगा। रशमीशाल वा वार कध से फिसलकर नीचे भ्ाने लगा ! कानो की बालियो के मोती व नाल चमक्‍त जा रह थे। जसे सात्विक विचारों मे कछोध की रेखा का मिश्रण हो । परो मं गो क खाल को मोचडी चू चरमर चू चरमर कर रहो थो । पेशवा क भ्रस्थिर विचारों को सूचक थी । जलाट पर पसीन को बू दें छाने लगी । श्रिपुण्ड कही कही से गोला हाते लगा। जस गरजते हुए बादल फुप्रार विखेर रहे हो । बाजीराव थोड समय तक भस्थिर विचारा को घूमधूम कर स्थिरता का जामा पहनाकर वाप बठक! पर बठता हुग्ना बोला सरदारा को बुलाझो ।चिटनिस के ताली बजाते ही द्वारपाल हाजिर हुआ और मुजरा करन लगा ॥ चिटनिस का भ्रादेश सुनकर खड परो ही वापस बाहर गया प्रोर पिलाजो जावव, नारो स्कर, तुको पवार मल्हार राव होल्कर को बैलाने के लिए हरकारा को भेजा ।




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