जातक माला | Jatak Mala

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
13 MB
कुल पष्ठ :
438
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)विषय-सूची१२ ब्राह्मग-जातक রি[ गुरु ने अपने शिष्यां के सदाचार की परीक्षा छा । उतने शिष्यों
में एक जाद्मण बालक हो परीक्षोत्तीर्ण हुआ, उसने गुरु कौ दरिद्रता
दूर करने के लिए भी चोरों को अधम श्रौर अनुचित समझा , ]१३ उन्मादयन्तां-जात्तक[ श्रत्यन्त स्पवती उन्मादयन्तो को देखकर बोधिसत्त्त शिबि गाज
भी मोहित द्वो गये थे । किंतु चैन और धर्माभ्यास के कारण उनका
मोह द््टा । ]¶१४ सुप रग-जातक[ विकराल समुद्र में पहुचकर जहाज की अवस्था सद्ूटापन्न हो
गई। यात्रियों ने जीने की आशा छोड दी। सुपारगने सत्य भीर
अहिंसा के प्रभाव से सब की रक्षा की । ]१५ मत्स्य-जातक[ प्रीष्म ऋतु में सरोवर के सूखने से मछलियों पर विपत्ति आई ।
प्रधान मत्य ने अहिंसा और सत्य के प्रभाव से जल बरसाकर
मछलियां को बचाया ; |१२ वतेका-पोतक जातक ४[ जगल में दावाझि प्रज्वलित हुआ । एक नव जात दबेल वर्तेका-
पोतक को छोडकर छोटे-बड़े सभी पक्षी उड़ गये । उस पक्षि शावक
ने स व पूत वाणी के द्वारा अम्नि को शान्तर किया । ]1७ कुम्भ जातक ४[ राजा संमित्र अपनी प्रजा के साथ নত पान में आसक्त था।
देवेन्द्र शक्त मदिरा से भरा हुआ घडा लेकर राज सभा के सम्मुग्व
अन्तरिक्ष में भ्कट हुए और उन्दने मध-पान के दोष दिखाकर
प्रजा सहित राजा को मद्रपान से विरत किया । ]३८ अपुत्र-जातक ध[ माता पिता के मरने से बोधिसत्त को वैराग्य हो गया। वे पुत्र
उत्पक्त किये बिना, नई॑ अवस्था में हो, घर छोडकर, प्रश्नजित हो
गये। ](৭২)१३०१३६१५५०१६२१६६¶७०
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