शिक्षा - सागर | Shiksha Sagar

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Shiksha Sagar by नथरमल - Natharmal

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अधिक सुपी व सफल होने के लिये अधिक दोस्त व अधिक हमदद दनाओ।9 प्राकृतिक वे ससारिव -यवहार, यहे एक मानी हई वाप्तव्रिक्वा है कि इस दूनिया म कोई भरी ताकतवर व धनवान नदौ, जो जपन वौ दूनर्‌ सताढ कर अलग वनाकर रह सक्ता है 1 जमर देना वह्‌ करने का प्रयत्न करेगा तो यह यकीवन समझ लेना चाहिए कि लोव राय (आम राय) क भाम विचार उसका सवनाश कर छोडेयगे । व्यापार हा चाह व्यक्तितत जीवन, जीवन म॑ मित्रा द प्रममिलाप के प्रिना सफ्तता प्राप्त करना बिल्कुल मुश्विल है। ऐसा ही बहेँ कि यह असम्भव है तो वेजा नहीं है । जा तुम्हार मित्र हैं वे तुम्हारे बाहरीय इष्टिबोण को देखबर तुम्ह नेक ये ठीक परामश दे सकत हैं सच्चा दास्त तुम्हें नेक व ठीक परामश (सलाह) दे मबता है ऐसे मित्रों का मलाह तुम्ह दूसरी तर” क्तिना मूल्य खच करने से भी मिलनी मुश्विल है। दोस्ती भी एक विचित्र (अजीव) मिलाप है ज्ञा एक वो दूसरे व लिये सच्चाई व वफादारी पदा बरती है । লাল দল रोटरी क्लब, मीसात लाउस ओर दूमरे ऐसे संगठनों बे बनम को भुराद वया है? मुराद सिफ यह है कि ज्यादा से ज्यादा मित्र भावना का नाता बटाय! जाये क्‍्याकि मित्रभावता व नात्त को हर जगह जष्ग्त महमूस वी जाती है । स्थाधार म भी अगर दूसर व्यापारियों के (वाम्पीटीशन) प्रतिद्वाशद्वता से अपर अपने कौ दूर रखना है तो मैं तुम्ह वहतर तरोका बता सूगा जितुम अपने ग्राहक को दोस्त बनाओ वयात्रि ग्राहक वही माल लेगा पमद बरगे जहाँ दोस्तान नमून (रुप) म व्यवहार किया जाता है । अगर तुम्हारे व्यापार म तुम्हें अधिव दोस्त हैं तो तुम्हें किसी से भो भय खाने वी जम्गत नहीं, और तुम हमशा फ्सत पूछते रहोग। अनुभव ने हम प्रमा- शित कर दिखाया है वि जिसदे व्यापार म मित्र हैं उनता व्यापार हमशा चांटी पर प,च (रहा) है।




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