कैवल्य ज्ञान प्रश्न चूड़ामणि | Kaivalya Gyan Prashna Chudamani

Kaivalya Gyan Prashna Chudamani by हंसराज बच्छराज नाहटा - Hansraj Bachchharaj Nahata

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about हंसराज बच्छराज नाहटा - Hansraj Bachchharaj Nahata

Add Infomation AboutHansraj Bachchharaj Nahata

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
নিরব यात्रा मुहूर्त १४८ | रोगमुक्त होनेपर स्नान करनेका मुहूर्त वार घूछ-नक्षत्र शूलका विचार १४८ | कारीगरी सीखनेका मुहूर्त चन्द्रवास विधार १४८ | पृक और खट्या, मचान आदि बनानेके मुहूर्त ঘর দত १४९ | कर्ज छेनेका মৃদু गृह निर्माण, नूतन गौर जीर्ण गृह प्रवेश मुहर्त १५० | वर्पारम्भमे हल चछाने, बीज बोने और फसल शान्ति और पौष्टिक कार्योके मुहूर्त १५१ काटनेके मुहूर्त कुमाँ खुदवाने और दुकान करनेके मुहर्त १५१ | नौकरी करने और मुकहमा दायर करनेके बडे-बडे व्यापार करनेके मुहूर्त १५२ | मुह नवीन वल्त, आभूषण बनवाने जोर घारण जूता पहननेका मुहूर्त करनेंके मुहूर्त १५२ | भौपध बनाने और मन्त्र सिद्ध करनेके मुहूर्त नमक बनानेका मुहूर्त १५३ | सर्वारम्भ मततं राजा या मन्वियोपे मिलनेका मुहूतं १५३ | मन्दिर बनानेका मुहूर्त बगीचा लगानेका मुह १५३ | प्रतिमा निर्माण और प्रतिष्ठा करनेके मुहूर्त हथियार बनाने और धारण करनेका महू्त. १५४ | होमाहुति मुहूर्त परिशिष्ट [२] जन्पपएतरी बनानेकी विधि टकार साधन करके नियम १६० | द्वितीय भाव--आधिक स्थिति ज्ञात भयात भौर भोग साधने नियम १६१ करनेकी विधि जन्मनक्षत्रका चरण तिकालनेकी विधि १६९ | घनी भौर दरिद्री योग छन्सारिणी १६३ | ततोय भाव--भाई-महनोके सम्ब्धमें विचार जनप लिलनेकी विधि १६४ | «तुर्थ भाव--पिता, ग्रह, मित्र आदिका विचार विशोत्तरी दशा निकाहनेकी विधि १६५ | ঘর্বম भाव-सन्तान, विद्या आदिका विचार अच्तर्दता साधन और सूर्यादि नवग्रहोके पष्ठ भाव--रोग आदिका विचार अन्तर्दशा चक्र १६७ | सप्तम भाव--वैवाहिक सुखका विचार जन्मपत्रीमें अन्तर्दशा लिखनेंकी विधि १६८ । अप्टम भाव--आयुका विचार जन्मपत्नीका फछ देखनेकी सक्षिप्त विधि १७० | नवम भाव--भाग्य विचार प्रहोका स्वरूप १७० | दशम भाव--पेज्ञा एवं उन्नतिका विचार प्रहोका बछावह और राशि स्वत्प १७१ | एकादश भाव--छाभाहाभ विचार द्ादश भावोके फछ १७२ | द्वादश भाव--व्यय विचार ग्रह ओर राशियोके स्वभाव एवं तत्व १७३ | विश्ोत्तरी दशाका फल शारीरिक स्थिति--कद, तप-रड्ध ज्ञान अन्तर्दशा फक फरनेके नियम १७३ | जन्मलमानुसार शुभाषुभ ग्रहवोषक चक्र परिशिष्ट [ ३] विवाहमें मेहापक-वर-कन्याकी कुण्डली गणना ग्रह मिलान १८० | भकूट विचार गृण मिलान १८० । नाडी विचार ५ १५४ १५५ १५५ १५९८ १५६ १५७ १५७ १५८ १५८ १५८ १५९ १५९ १७४ १७४ १७५ १७५ १७६ १७७ १७७ १७७ १७८ १७८ १७८ १७८ १७८ १७९ १७९ १८० १८१




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now