बीसवी शताब्दी में भारतीय महिलाओं का सामाजिक एवं राजनीतिक जागरण | Beesvee Shatabdi Me Bharteey Mahilawon Ka Samajik Avam Rajneetik Jagran

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Beesvee Shatabdi Me Bharteey Mahilawon Ka Samajik Avam Rajneetik Jagran by हर्षनाथ - harshnath

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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रे হক कन्या का जन्म दक दुखद घटना माना जाता था । हवति मै प्रभाक वर्थन कशता है कि पुत्री कै जत्म पर व्यात भायू व्छातै थै ।* बासविवाह का प्रभलन शी तक दुद्रा प्राष्स नहीं कर জরা গা | राजबो, महा।वैता, आवात्यिरी तथा कसिदास की प्रमुख पा्जी शकुत्तता' विवाह के समय युवती थीं । परन्तु जहाँ पर्‌ स्मृति श्रै फा पालन शौता धा । सर्वक्षाधारणा तथा' पुरातनपंवी প্িন্ছু परिव पैं विवाह की জাহু গণ घटा' वी गई थी । उदाह्ए्लार्थमन्रु सितै हैं कि तीस অক্ষর ঘুর এপ जाएह बर्जा की सथा चौजीस वजीय युवक कौ' बाठ দত কী कन्था सै विवाह करता পাতি | कालान्तर मैं लाल विवाह की प्रवारि श्रौए भी अधिक बढू गई थी | यौग्य পন লিল অজ ফাস थे हो জিলা कर दैना' बाजिए, परन्तु प्रत्यक्ष दशा मैं ब्ौटी आयु मैं विवाह कर धना चाहिए । एच समय आयु के प्लुत्ार कालक पै उमः नाम षै तथा केम प हर्दा रायु লী দিলা भौरमे क्षा विधान उचित माना गया । ढा० बल्टैकर मे वाल-विवाह की व्यापकता के अगैक काएएा बताए हैं * उन अनुप्ताप्‌ समाज के उच्च बयां मे भी পিদ্পতরী ৯ পারা को अपनाना পাস कर दिया धा । {तीय जाति प्रधा ¢ अधन कठौर्‌ हींगे कै काएए पिता के सामने... यौग्य वर के चुनाव का श्रौत प्रत्यन्त सौमित हौ जाता था तथा अल्यत्रायु ध विह , करने चै पिला पुत्री के भाँविष्य की भर से सिरि हौ जता धा । जत्टैकर कै मत. से सयुवत परिवार ज्रावाली भी छात्ञ विवाद कौ प्रौत्याहन दैगे का रुक काएए' था ययौ वर्‌ $ জীছিকীঘাজন ঘীন্ঘ औौते की जावश्यक्ता कम अमुभव की जाती ६, ||. ९, ८. ष 92. 1৮০01 २, পিযহ্জন্ষণী' पहैतु कम्याँ हुवा -वशरवाषशनेप्‌ । पुष्टं वणँ इवय ता धु सौदति सत्वः || मनु » ६1६४ ३, दथदुनुणवते कन्या লব্ধ ভাত | শা শা गृणहीनाय नैपलनरव्या इजस्व्ाम्‌ || ५.८९. ?. २।८ ४, शष्टव्ण भवेत्‌ गौ नकद তু হীক্ষিতা | दरव भवितु कन्याः भत জামী ফেলা || 0 - 4५५ 1 २६।२२




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