भारतीय शिक्षा तथा आधुनिक विचारधाराएँ | Indian Education And Modern Concepts

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : भारतीय शिक्षा तथा आधुनिक विचारधाराएँ  - Indian Education And Modern Concepts

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

डॉ. विद्यावती ‘मालविका’ सागर नगर की एक ऐसी साहित्यकार हैं जिनका साहित्य-सृजन अनेक विधाओं, यथा- कहानी, एकांकी, नाटक एवं विविध विषयों पर शोध प्रबंध से ले कर कविता और गीत तक विस्तृत है। लेखन के साथ ही चित्रकारी के द्वारा भी उन्होंने…

Read More About . Dr VidyawatiMalvika'

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
१४ १: ४ भारतीय शिक्षा तथा आधुनिक विचारधारा | लाइ-प्फ्र भी है। इस लाड़-प्यार के कारण वे यह सहन नहीं कर सकती कि उनके इस उत्तरदायित्व को कोई ओर वहन करे | इतना ही नहीं, वे ऐसा मानती हैं कि उनसे अधिक अच्छी तरह अन्य कोई इस कार्य को कर नहीं सकता | छठवाँ कारण पूर्व-प्राथमिक शिक्षा का महँगा होना है | प्राथमिक-शिक्षा से भी अधिक खरचीली पूर्व-प्राथमिक शिक्षा अभी तक रही है। अतः इसे केवल उच्च-वर्ग के बच्चों के योग्य ही समझा गया है। अब भी यदि इसे, पूर्ब-बुनियादी के समान, सस्ता नहीं किया जायेगा क्तो भारत में मांटेसरी, किंडरगाटन आदि विधियों का प्रचार देश के उच्च वर्ग तक ही सीमित रहेगा | 2 पूवे-प्राथमिक शिक्चा-परसार के उपाय इपर खस्ता बनाया जाये } सस्ता बनाने के छिए इसे मटिसरी या च किंडरगार्टन विधियों के पदचरणों पर चलाने की अपेक्षा पूर्व-बुनियादी कै ठचि में ढाल जाये | जनता को शिक्षित करके बालक के प्रथम पाँच या छः वर्षो के महत्त्व को समझाया जाये | गाँवों में तथा आस-पास के आवागमन के साधनों को सुधारकर गाँवों ॐ जीवन को सरस, मधुर तथा उन्नत बनाया जाये | इससे पूर्व- प्राथमिक शार्ओं को शिक्षिकाएँ गाँवों में रहना पसन्द करेगी | * ঘুন-সাখজিক্ক शिक्षिकाओं को गाँवों में रहने के लिए. आवास आदि की सुविधाएँ दी जायें | उनका वेतन तथा सेवा की शर्तें भी आकर्षक बनाई जायें | * स्वायत्त शासन संस्थाओं को बाल-मन्दिर खोलने के लिए प्रेरित किया जाये | * ম্বান্ত-নন্হিহী হী प्राथमिक शाला तथा गाँव के शिशु-कल्याण-कैन्द्र से संलगन किया जाये। ये तीनों प्रायः एक ही जगह स्थापित होना चाहिए । ऐसा करने से खर्च भी कम पड़ेगा | * प्रशिक्षण के लिए शहरों की अपेक्षा गाँवों की पढ़ी-लिखी महिलाओं की ओर अधिक ध्यान दिया जाये, जिससे वे जाकर अपने गाँवों में बाल-मन्दिरों का कार्य कर सकें |




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now