कबीर साहिब की ज्ञान गुदड़ी रेख़्ते और झूलने | Kabir Sahib Ki Gyaan Gudadi Rekhte Aur Jhulane

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
16.17 MB
कुल पष्ठ :
72
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
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राम का नाम ले बिस्न सुमिरन करे,
_ सनकादि ब्रह्मादि का पार पावे न हद
रखते.
दे.
राम का नाम सिव जोग छ्यानी ॥
राम का नाम ले सिद्ध साधक बने,
सिव सनकादि नारद गियानी ।
राम का नाम ढे रामचंद दृष्टि लट्ट,
गरू बसिष्ठ मये मंत्र दानी ॥
कहाँ लो कहैहँ अगाध लीला रची,
राम का नाम काहू न जानी ।
राम का नाम ले करन गीता कथी
बाँचिया सेत तब मम जानो ॥
है केसा निरगन निराकार परम जोति
तासु को नाम निरंक्ार मानी ।
रुप बिन रेख बिन निगम अस्तति करे
सत्त की राह अकथ कहानों ॥
बिस्न सुमिरन करे सिव जोग जा के धरे
भने सब ब्रह्म ब्रेदान्त गाया 1
तासु का नाम कह रामराया ॥
_ कहें कबीर वह सक्स तहकोक कर,
राम का नाम जो एथी छाथा।
(११) एक
. संत की चाल संसार ते भिन्न है
सकल संसार मं चुहरु- बाजो* |
(१) झादमी । (२) दिज्ञगी, भूठा सेल !
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