श्रीमदवाल्मीकिरामायण बालकांड iii | Madwaleeki Ramayan Balkand (iii)

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Madwaleeki Ramayan Balkand (iii) by बालकाण्ड - Balkand

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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# १ र क श क शः सलि फिर अदा. = नः असर्वा सर्ग २२ पेसट्ाँ सग | ( १३ ) चासटर्भो सगं ४१५--२१ राजा अम्बरीष का पुष्कर में आगमन । शन.शेप का विश्वामित्र के निकट जा प्राण वचाते अर अम्बरीष का अधूरा यज्ञ पूण होने के लिए प्रार्थना करना । विश्वामित्र करा शुनःशेप के वदले अपने पुत्रों को नरपश चन कर राजा के साथ जाने की आज्ञा देना । आज्ञा न सानसे पर विश्वामित्र का पत्रों को शाप देना । विश्वामित्र के चतलाए मंत्रों का जप करने से शुनःशेप की यज्ञ में रक्षा और ब्यस्वरीप के यज्ञ की समा्ति । ् २८ विश्वामित्र का ओर मेनका का समागम । पीद्धु पुष्कः चेत्र दोड विश्वामित्र का बत्तर दिशा में जा कौशिकी के तट पर रह कर तप करना । किन्तु वहाँ भी अभीष्र सिद्ध न होना । उनका पुनः घोर तप करना | चौसठवाँ सग ४२८--४३३ विश्वामित्र को तपसं डिगानेके लिए इन्द कारन्भा अप्सरा को विश्वामित्रके पास अजना । विश्वामित्र त्य क्रोध में भर रम्भा को शाप देना । क्रोध के कारण नर नष्ट होने पर विश्वामित्र का आगे कभी क्रोध न करने का सङ्कल्प करना । एक हजार वर्पां तक निराहार तप करे मित्र का आहार करने को वठना 'झोर उस का रूप धर इन्द्र का आ कर विश्वामित्र श्ौर विश्वामिन्न का उनकी अपने सा {१ 4 = = =




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