गौतम परिच्छा | Gotam Prachchha
श्रेणी : धार्मिक / Religious

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
288 KB
कुल पष्ठ :
32
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(९) 'वान होते है, और दुर्ुद्धि की तरह कहीं झादर नहीं पाते । ५ डॉ
०. हितेपि; १६ भ्रन-दे जगज्जीवहितेपिन् 1 किसकर्म से जीव पंडित होतेदे? - ,उन्तर--गोतम } जो बृद्धो की सेवा करते
हैं, पुरय और पाप को जानते है, शाख देव
शुरु आदि की भक्ति करते हैं वे जीव मर कर
पंडित होते हे । क दूँ रिफ३के१७ परश्न-हे जगदार्तिविदान ! किस कर
सें जीव मूर्ख होते हें ? = आ,उत्तर-गोतम ' 'जो ऐसा बोलते है कि
महाशयो ! चोरी करो, मांस खायो, मेदिरा
पान करो; पढने से कया होता है; धर्म करे.
से छय.रयदा नी होता, वे-जीव भृः
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