सत्य-संगीत | Satya-Sangeet

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
142
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)भ
तरा प्यार [ ५भने चाहा तेए प्यार
छन करनेमें छला गया मैं चनकर मूर्ख गमार | मैंने ।
समझा था तुन्नकों छल्ता हूँ
अच समझा में ही जलता हूँ
तुझको धोखा देना ही था धोखा खाना आप ।
जव समझा व. मन में वठा देख रहा सब पाप ॥
मेरा चर् हआ अभिमान
तेरी देख पड़ी मुसकान
नरे चरणो पर वर्सानि टमा अश्र की धार् |
मैंने चाहा तेरा प्यार ॥ दे ॥
मने चाहा तेत प्या
नेग आदद मिद्य तत्र सञ्च पड़ा ससार ॥ मैन 1
जाति पाँति का मोह छोड़ कर
ऊँच नीच का भेद तोइ कर
आया तेर पास, दिखाया तने अपना ठाठ
सर्वघर्म सम-भाव; अहिंसा का सिखलांया पाठ
मने पाया सलय-ममाज
जिम्मशातेय ही साज
हआ विश्वमय, विश्ववन्धु मँ तेय दिदमतमार
मेने चाहा तेग प्यार |
बस कर६5:55
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