ब्रह्मचर्य के पाँच आचार्य | Brahmchary Ke Panch Aacharya

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutUmesh Chaturvedi
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
98
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about उमेश चतुर्वेदी - Umesh Chaturvedi
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( ६ )चीर उनके वारो गाई बाहुर गये हुये भे । जमदग्नि ने राजा का
स्वागत फिया श्रार बड़े ्रादर से उन्हें स्थान दिया । सहस्त्राज न
उस जमाने में चढ़ा प्रतापी राजा था चरै यदै राजा मदासजा
उस नाम सं कपत थे । क्योकि यदु वडा वीर पराक्रमी था!
दी कारण उसको 'घ्रमिमान भी होगया था ।जमदग्नि ने उनल्लागों का सत्कार करने में कोई कमी न
रक्रा जमदग्नि कं पसर कोमधेनु याय थी वह् गाय वड़ी सुन्दर
पार स्वस्थ थी । उसका दूध भी नना स्वादिष्ट रोता था कि
संसार म॑ शायद दी किसी गाय का ऐसा दध टोता हो । सच से
चड़ां तारीफ की यात यद्र थों कि आवश्यकता पड़से पर वह उतना
ही दूध दे सकती थी जितने कि जरूरत हो । इस समय भी उतने
हतना दूध दिया कि उन लोगों से पिया भी से राया |सदम्ताजु न को वडा श्राश्वयै हुआ । उसकी नजर भी गाय
पर पटु गद् | वस फोरन मन बदल गया उसने जमदग्नि से
वद् गाय मांगी । लेकिन जमदग्नि का नो निर्वह दी उसके दयाय
दोता था । सदख्राजुन के कई चार मांगने पर भी उन्दोंने गाय
नदीं दी । †सदस्राजन को वड़ा क्रोध श्याया } वह् जबरदस्ती दही उस
गाय को लेकर चहाँ से चल द्विया । जमदग्नि करदह क्या सकते
थे । चुप चाप उदास द्ोकर बैठ गये |उसी संमय वहां परशुराम श्रपने भाइयों सहित आा पहुंचे ।
साना पित्ता को उदास देख कर बोले क्या कारण है श्राप श्राज्
उदास बेठे हये हैं ।” माता पिठा ने उसी समय श्पनों उदासी
का कारण कह सुनाया । सुनते हो परशुराम जी क्रोध से धीर
हौ उठे श्र कहने लये वस्र इतनी सी वत के लिये ही छापवषै
User Reviews
No Reviews | Add Yours...